जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा के दर्शन, अभिषेक, पूजन, भक्ति कर श्रेष्ठतम मानव जीवन को सार्थक करें।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
सलूंबर
तत्वार्थ सूत्र के पहले सूत्र अनुसार सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र रत्नत्रय मोक्ष मार्ग का पहला कदम है ।पहले कदम के बाद दूसरा कदम, फिर तीसरा कदम अगले कदम चलते-चलते आप रत्नत्रय धर्म को प्राप्त कर निर्वाण तक सिद्धालय जा सकते हैं। पूजन किस प्रकार करना चाहिए, दर्शन किस प्रकार करना चाहिए यह श्रावक के मूल कर्तव्य हैं।
भगवान के दर्शन अभिषेक में भगवान के गुणों का स्तवन करना चाहिए, कि जिस प्रकार आप केवल ज्ञानी है, मैं भी यही चाहता हूं कि आपकी भांति संसार को जीतकर मुक्त होकर जयवंत बनू।जिन दर्शन ,पूजन में भगवान का मन वचन काय से गुणगान करें । जिनालय में श्रेष्ठ मानव कुल का मन रखें क्योंकि भगवान के अवलंबन से आपको धर्म चेतना प्राप्त होगी इसी से सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र प्राप्त होगा।




यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने जैन बोर्डिंग सलूंबर की धर्म सभा में प्रकट की। ब्रह्मचारी गजू भैय्या,प्रदीप भैया, राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि आध्यात्मिक संस्कार शिविर में आपको धर्म देखने, श्रवण करने और समझने का अवसर मिला । श्रेष्ठतम से श्रेष्ठतम मानव जन्म प्राप्त किया है, जिनेंद्र भगवान और जिन शासन ,जिन धर्म कई जन्मों के संचित पुण्य से प्राप्त हुआ है। भगवान के दर्शन कर दर्पण रूपी स्वरूप का चिंतन करें और भगवान से प्रार्थना करें कि मैं संसार के परिभ्रमण से थक गया हूं, मेरे कर्मों, बुराइयों का नाश हो। पंडित कमलेश,देशवृति हुकमीचंद जी ने बताया कि आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री मुमुक्षु सागर जी ने अपने उपदेश में सभी को सभी के मंगल देखने ,करने का सूत्र दिया, इसके लिए राग द्वेष मोह कषाय को कम करने की प्रेरणा दी। इन्हीं के कारण जीव संसार में परिभ्रमण कर रहा है
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सलय भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
