“मंगलमय हो वर्ष तुम्हारे “
कहते हैं कि जो प्रतिमा जितनी प्राचीन हो जाती है उसमें एक चमत्कार उत्पन्न हो जाता है ऐसा ही भारत गौरव ग्वालियर
तिलक सम्यकज्ञान शिरोमणि गणिनी आर्यिका का श्री विशुद्ध मति माताजी के संदर्भ में यह सूक्ति सटीक बैठती है आर्यिका105 श्री विशुद्धमति माताजी प्राचीन आर्यिका माता जी है इनके अंदर भी ऐसा ही अतिशय चमत्कार उत्पन्न हो गया है।
जनमानस की आप मसीहा बन गई हैं उन्होंने सन 2009 में
अपनी कई शिष्यों को अपनी ही तरह संयम के पद पर आकर्षित किया और उन्हें मोक्षअनुगामी बनाया एक अनुपम हीरे की भांति उन्होंने विद्या वाचस्पति प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका श्री विज्ञमति माताजी आर्यिका श्री विजित मति माताजी एवं आर्यिका श्री विकर्ष मति माताजी को विजयादशमी के पावन अवसर पर कोटा राजस्थान में आर्यिका दीक्षा प्रदान की थी, आर्यिका विज्ञमती माताजी की अपनी गुरु मां के प्रति वात्सल्यपूर्ण एवं प्रतिक्षण सेवा सुश्रुषा में रत “गौ-वच्छ सम प्रीति साधारण जनमानस के लिए अनुपम उदाहरण है जो सभी के लिए अनुकरणीय है ,
अस्वस्थ चल रही अपनी गुरु मां के साथ प्रतिक्षण परछाई की





तरह साथ रहने वाली,” गुरु शिष्या” की प्रीति चिरस्थाई रहे, ऐसी हम मंगल भावना भाते हैं, गुरु मां मुझे अल्पज्ञ को भी स्व समान बनायें ऐसी मंगल भावना है एटा में वर्ष 2024 के वर्षा योग के दौरान आर्यिका श्री विज्ञमती माताजी आर्यिका श्री विजित मति आर्यिका श्री विकर्षमती माताजी के 17 वें महाव्रत संस्कार दिवस पर अखिल भारतीय दिगंबर जैन महिला संगठन गुरु मां के पावन चरणों में त्रिकाल वन्दामि निवेदित करते हुए यही भावना भाती हैं कि आपका रत्नत्रय सकुशल निर्विघ्न चलता रहे आपकी प्रस्फुटित रश्मियां जन-जन के मानस को तिरोहित करती रहे अपनी कल्याणकारी, ओजस्वी, वात्सल्यमई मंगल वाणी से हम
सभी के लिए भी कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती रहे इन्हीं शुभकामनाओं के साथ दीक्षा दिवस की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं🙏💐
बबिता जैन प्रेरणा, अध्यक्षा,अ०भा०दि०जैन महिला संगठन जैन नगर, एटा,
