भगवान का रुप सौन्दर्य अपने स्वरुप सौन्दर्य की ओर ले जाता है जो राग का प्रतीक न होकर वैराग्य की ओर होता है”प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
“तेरी सूरत से मिलती नहीं किसी की सूरत है, में जहा में तेरी तस्वीर लिये फिरता हुं” भगवान का रुप सौन्दर्य अपने स्वरुप सौन्दर्य की ओर ले जाता है जो राग का प्रतीक न होकर वैराग्य की ओर होता है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने “भक्तामर” महाकाव्य की विवेचना करते हुये व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि आजकल रुप की ओर आकर्षित होंने वाले लोग बहुत है,अपने स्वरूप की ओर देखने वाले बहुत कम है।मुनि श्री ने कहा कि लोक में सुंदर रुप ही आकर्षण है, जहा प्यार शरीर से किया जाता है वहा मात्र देह का आकर्षण होता है। सुंदर लगने वाली चीजें भी असुंदर लगने लगती है” लेकिन जहा आत्मिक प्रेम होता है वहा पर आल्हाद होता है और वहा प्रेम बढ़ता ही बढ़ता है।
भगवान के प्रति प्रेम में मात्र आकर्षण ही नहीं आल्हाद
है।”अनिमेष विलोकनीय” सुंदर कौन जो आल्हाद उत्पन्न करे। जिससे काम क्रोध लोभ मोह बड़े वह असुंदर और जिससे काम क्रोध लोभ मोह शांत हो वह वास्तविक सौन्दर्य है। रूप सौन्दर्य के साथ आत्म सौन्दर्य को पहचानने वाले ही सच्चे अर्थों में सौन्दर्यानुभूति कराता है,जिसका इससे परिचय हो जाता है वह आत्मानुभूति कराता है।
उन्होंने कहा आकर्षण मात्र शरीर का नहीं होता आकर्षण त्याग तपस्या और वैराग्य का होता है जो हमें आंतरिक रुप से खींचता है। भगवान के दर्शन आंखें खोलकर करो आंखों में बसा लो और आंख कब बंद हो जाएगी पता ही नहीं लगेगा।
महाराज श्री ने कबीर दास जी के दोहे को बताते हुए कहा कि कबीरदास कहते है “नयनन की करी कोठरी, पुतली पलंग विछाय।
पलकन की चित्त डारके,पिय को लिये रिझाय।।अपने प्रभु को रिझाना या प्राप्त करना है तो नयन पथ गामी बनो।जिसने एक बार आपका दर्शन कर लिया फिर उसे दूसरे के दर्शन करने की इच्छा नहीं होती। जिसने एक बार क्षीरसागर का जल पी लिया उसे फिर और कोई जल अच्छा नहीं लगता।

उन्होंने कहा कि परमार्थ का सुख जो आनंद देता है उसे अन्य सुख अच्छा नही लगता मुनि श्री ने कहा कि कोई नयनों को चुराता है क्या? जिसने भगवान के पास जाकर एक आनंद की अनुभूति कर ली उसका ये धन ये दिवस धन्य हो जाता है।
धर्म प्रभावना समिति के मीडिया प्रभारी राहुल जैन अध्यक्ष अशोक डोसी महोत्सव अध्यक्ष नवीन आनंद गोधा महामंत्री हर्ष जैन प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रतिदिन प्रातः6 बजे से जैनम् की कक्षा मुनि श्री निर्वेग सागर जी महाराज तत्पश्चात7:30 से अभिषेक एवं शांतीधारा 8:30 से9:30 बजे तक आचार्य मानतुंगाचार्य रचित “भक्तामर” पर विशेष व्याख्यान 9:45बजे से मुनिसंघ की आहार चर्या 3 बजे 4 बजे तक समयसार का स्वाध्याय एवं 5:45 से6:45 तक शंकासमाधान कार्यक्रम मोहताभवन रैसकोर्स रोड़ पर संपन्न हो रहे है।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
