स्वस्तिभूषण माताजी सानिध्य में शिविर में आए शिक्षकों का सम्मान किया गया कर्म बंध का कारण वस्तु के प्रति मोह मूर्छा है स्वास्तिभूषण माताजी 

धर्म

स्वस्तिभूषण माताजी सानिध्य में शिविर में आए शिक्षकों का सम्मान किया गया कर्म बंध का कारण वस्तु के प्रति मोह मूर्छा है स्वास्तिभूषण माताजी 

  स्वस्तिधाम जहाजपुर  दशलक्षण पर्व के नवम दिन धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी ने कहा कि जो वस्तु हमारे पास है कर्म का बन्ध उस वस्तु के कारण नहीं होगा कर्म बन्ध का कारण वस्तु के प्रति मोह मूर्च्छा है जिस वस्तु को हम अपना मान लेते है उस वस्तु को संभाल कर रखते हैं कोई उसे ले लेते है तो क्रोध करते है मायाचारी लोभ भी करते है वस्तु के चोरी हो जाने पर शोक करते है खराब होने पर दुःखी होते है अर्थात् उस वस्तु के प्रति हम इतने मोही हो जाते है कि हमें अपनी आत्मा का ध्यान ही नहीं है।

 

माताजी ने कहा हम वस्तु के सुख से सुखी उसके दुःख मे दुःखी होते है इसलिए भगवान महावीर ने अधिक परिग्रह पास में होने में नहीं बल्कि मूर्च्छा परिग्रह बताया है।

 

 

 

हम भावों के साथ बन्धे है और भावों से छूटना है जब आत्मा और संसार शरीर भोगों का भेद विज्ञान होता है तब त्याग संयम तप जीवन में आता है जिसके माध्यम से कर्म भी झरते है और शुद्ध आत्मा अकेली रह जाती है अर्थात् उत्तम आंकिचन धर्म प्रगट होता है किचिंत मात्र भी कुछ मेरा नहीं है।

 

एक उदाहरण के माध्यम से बताया कि एक सेठ ऊँटो को लेकर जा रहा था रास्ते के पड़ाव मे बांधने के लिए रस्सी नहीं थी सेठ ने कहा कि झूठ मूट गले मे हाथ डालकर रस्सी बांध दो सुबह सारे ऊंट चलने लगे लेकिन जिसके गले में झूट मूठ रस्सी डाली वह नहीं हिला सेठ जी ने कहा जैसे बांधा वैसे ही खोल दो ऊंट चल पड़ापशु पक्षी के पास परिग्रह नहीं लेकिन उनके पास आंकिचन धर्म प्रगट करने की योग्यता नहीं है।

 

 

इस अवसर पर सुमत प्रकाश लक्ष्मी जैन दिल्ली वालौ मंदिर निर्माण में अनुदान की घोषणा की साथ ही आहार दान में दान देने घोषणा की । इसके साथ भोजन व्यवस्था मे पेच की बावड़ी नवयुवक मण्डल ने सेवा दी।

 

 

 

माताजी के सानिध्य में शिक्षक दिवस पर शिविर मे पधारे सभी शिक्षकों का सम्मान किया गया 

    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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