क्षमावाणी में छल नही हो, नशा जीवन में मंगल करता है इसलिए नशे का त्याग करना चाहिए विमल सागर महाराज
खिमलासा
परम पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ सानिध्य में क्षमावाणी पर्व मनाया गया पर्व के अंतर्गत महाराज श्री ने क्षमा के विषय पर प्रकाश डाला और नशा नहीं करने की सीख देते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि सभी लोगों ने पूरे भारत में उपवास किए हैं।
उन्होंने कहा की क्षमा शूरवीर की होती है, उपवास कर्मों का शोधन करता है। रथ यात्रा के माध्यम से आनंद









मनाया जाता है तीनलोक के नाथ आपके घर के सामने आते हैं। इंद्र भी नृत्य करते हुए चलते हैं। जो रथयात्रा में जितना लुटाता है, उसको सर्वश्रेष्ठ सुख मिलता है। प्रभु की जो शोभायात्रा में कंधे लगाता है उसका ऐसा पुण्य संचय होता है कि वह नीचे नहीं चलता है। क्षमा अपने आप में सबसे बड़ा धर्म है, क्षमावाणी मनाने के लिए सभी आए हैं। क्षमावाणी में छल नही हो, नशा जीवन में अमंगल करता है इसीलिए नशे का त्याग करना चाहिए।
पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने भी क्षमा के विषय में प्रकाश डाला और उन्होंने कहा की क्षमा से व्यक्ति फूलों सा हल्का हो




जाता है। क्षमा उनसे मांगे जिनसे हमारी बनती नहीं है। क्षमा ना करने से व्यक्ति तनाव ग्रस्त रहता है। क्षमा वंदनीय है, क्षमा जिंदगी है, क्षमा साधना, क्षमा प्रार्थना है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जिसने हमेशा दुश्मन की भूलों को भी क्षमा किया है। क्षमा देने से और क्षमा मांगने से चारित्र निर्मल होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
