“धन वैभव की प्रचुरता लोभ की पहचान नहीं,धन की आसक्ति लोभ की पहचान है”प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागरजी महामुनिराज केपरम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन “उत्तम शौच धर्म” पर मोहता भवन रैसकोर्स रोड़ पर व्यक्त करते हुए कहा कि धन विपुलता या धन की प्रचुरता लोभ की पहचान नहीं धन की आसक्ति लोभ का प्रतीक है” उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि आपके सामने अशोक पाटनी बैठे है,देख लीजिये धन वैभव के साथ यदि व्यक्ति उदार हृदय है तो उसकी धन के प्रति आसक्ति नहीं रहती वही दूसरी ओर चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाऐ वाला व्यक्ति लोभी कहलाता है।
महाराज श्री ने कहा कि पैसा को अपने ऊपर हावी न होंने दें, पैसा के ऊपर हावी रहें,धनाढ्य व्यक्ति की यही पहचान है।जिसको अपने पैसा का अभिमान होता है उसे पैसा की आसक्ति भी होती है और जिसको आसक्ती होती है उसकी एक पाई भी इधर से उधर खर्च नहीं होती उनके हृदय में कभी शौच धर्म नहीं पल सकता और शुचिता के अभाव में कभी पवित्रता भी नहीं आ सकती।







मुनि श्री ने कहा कि ऐसे लोग अपनी दुर्बलता से कभी मुक्त नहीं हो पाते। मुनि श्री ने कहा कि “जीवन के लिये पैसा है पैसा के लिये जीवन नहीं”उन्होंने कहा कि जितना है उसी का सद व्यय करो, मन का कटोरा और इच्छाओं की पूर्ति कभी होती नहीं “तृष्णा की खाई खूब भरी पर भर न सकी इच्छा ज्वाला”इच्छा आकाश के समान अनंत होती है दूर क्षितिज की ओर जब दृष्टि जाती है तो ऐसा लगता है कि दो चार किलोमीटर और जाएगे तो धरती आसमान एक मिलेगा लेकिन जैसे जैसे आगे बढ़ते है कि क्षितिज और दूर होता चला जाता है। इसी प्रकार हमारी धन के प्रति आसक्ति है वह धन को जितना जितना कमाता है उसके मन का असंतोष बढ़ता जाता है,अपनी कमाई से कभी संतोष नहीं होता उन्होंने कहा कि यदि आप अपने जीवन को आनंद से भरना चाहते है तो लोभ की प्रवृत्ति को अपने जीवन व्यवहार से हटाइये और अपनी इच्छाऐं सीमित कीजिये जरूरत की ओर ध्यान दीजिये अनावश्यक इच्छाओ को विराम दीजिये।
धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता एवं प्रचार प्रमुख अविनाश जैन विद्यावाणी एवं राहुल जैन (स्पोर्ट्स) ने बताया प्रातः5 बजे से भावनायोग के साथ दिन की शुरुआत हुई तत्पश्चात भगवान पुष्पदंत स्वामी के मोक्ष कल्याणक अवसर पर निर्वाण लाडू श्री सम्मेद शिखर जी तीर्थ पर सुप्रभ कूट की कल्पना करके समर्पित किया संघस्थ प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्र. अशोक भैया लिधोरा का जन्मदिन को मुनि श्री के आशीर्वाद के साथ मनाया गया श्रावक संस्कार शिविर के श्रावक श्रैष्ठी भामाशाह अशोक जी पाटनी एवं श्री मति सुशीला पाटनी के साथ धर्मप्रभावना समिति के पदाधिकारियों तथा शिवरार्थिओं के साथ लिधोरा से आए परिवार के सदस्यो ने शुभकामनाएं दी एवं भगवान का अभिषेक एवं शांतीधारा एवं मुनि श्री को “आहारदान” का सौभाग्य भी मिला।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
