जीवन में सरलता आ जाना ही उत्तम आर्जव है। प्रज्ञासागर महाराज

धर्म

जीवन में सरलता आ जाना ही उत्तम आर्जव है। प्रज्ञासागर महाराज
झालरापाटन।
दिगंबर जैन समाज के 10 लक्षण पर्व के तीसरे दिन मंगलवार को श्रावकों ने उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार कर विशेष पूजा अर्चना की। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, चंद्रप्रभ मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर, सांवलाजी मंदिर, आदिनाथ मंदिर, नेमी नगर लालबाग स्थित सीमंधर जिनालय, कल्पतरु पार्श्वनाथ नसिया, अतिशय क्षेत्र जूनी नसिया मे सुबह से ही शांतिधारा और अभिषेक के साथ नित्य नियम पूजन, 10 लक्षण पूजन की गई। शांतिनाथ बाड़ा मे तपोभूमि प्रणेता एवं पर्यावरण संरक्षक आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में विधानाचार्य राजकुमार जैन बैंक वाला ने संगीतकार कटनी निवासी पदमचंद के मधुर स्वर लहरियों के साथ विधान की पूजा करवाई। जिसमें सौधर्म इंद्र बने सुनील कुमार रौनक कुमार लुहाडिया के साथ अन्य पुरुष एवं महिलाओं ने पूजन की।

 

 

 

 

 

 

प्रवक्ता यशोवर्धन बाकलीवाल ने बताया कि दोपहर 2:30 बजे शांतिनाथ मंदिर में हेम श्री माताजी के सानिध्य में तत्वार्थ सूत्र, शाम 6:30 बजे शांतिनाथ बाडा में प्रतिक्रमण और 7 बजे से आनंद यात्रा हुई। इसके पश्चात श्रावको ने आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज की आरती की।

जीवन में सरलता आ जाना ही उत्तम आर्जव है। आचार्य प्रज्ञा सागर

आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा कि जीवन में सरलता आ जाना ही उत्तम आर्जव है। हमारे जीवन में ऋजुता तभी आएगी जब हम अंदर बाहर से एक हो जाए। मन,वचन, काय मे समानता आना ही आर्जव भाव है। हमारे भावो में जितनी सरलता आती जाएगी हमारी दुर्गतियों का नाश होता जाएगा। शास्त्र में भी कहा गया है कि उत्तम आर्जव कपट मिटावे, दुर्गति, त्याग सुगति उपजावे। उन्होंने कहा कि आर्जव धर्म हमें कपट नहीं करने, माया कपट छोड़ने, सीधा और सरल रहने, मन वचन और काम में सीधापन होना यही सिखाता है।

 

हम दुनिया को तो सीधा करने में लगे रहते हैं पर अपने को सीधा करना नहीं सीख पाए हैं। अपने को ही कम, कर्ता और साधक बनाना , एकत्व की भावना को दूर भगाना यही श्रेष्ठ आर्जव मार्गहै।
नलिन जैन लुहाड़िया से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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