मुनियों की जन्म भूमि, निर्वाण भूमि, तथा दीक्षा भूमि बोली ने अश्रुपूरित नेत्रों से दी आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज संघ को दी विदाई
बोली राजस्थान
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा में वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 5 दिवसीय अल्प प्रवास के बाद दीक्षित शिष्य मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज की जन्म भूमि एवम् क्षपक मुनि श्री श्रेयस सागर जी महाराज की निर्वाण भूमि तथा मुनि श्री दीप्त सागर जी महाराज की दीक्षा भूमि बोली से सैकड़ों निवासियों ने सजल अश्रुपूरित नेत्रों से विहार कराया।
अपनी दीक्षा के 14 वर्ष बाद मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज अपनी जन्मभूमि पर आए

उल्लेखनीय है कि मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज की मुनि दीक्षा सन 2008 में हुई।जिस प्रकार अयोध्या के श्रीराम जी 14 वर्ष बाद अयोध्या वापस आए ,ठीक उसी प्रकार बोली के मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज भी मुनि बनने के 14 वर्ष बाद जन्म भूमि बोली आए।
आचार्य श्री संघ के 5 दिवसीय अल्प प्रवास में भव्य प्रवेश में हजारों श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक स्वर्णिम आगवानी की। संघस्थ मुनि श्री श्रेयस सागर जी महाराज की अनायास समाधि होने से नगर के निकट सोगानी कालेज परिसर में अग्नि संस्कार आचार्य श्री सहित संघ सानिध्य में हुए।
सचमुच यह धरा तो पुनीत और पावन थी। पर अब और पुनीत पावन हो गई है। क्योंकि यह धरा अब किसी तीर्थ से कम नहीं आंकी जा सकती। जहां मुनि दीक्षा हुई हो, जहा समाधि हुई हो, जहा मिट्टी ने, यहां की पावन धरा ने एक महाश्रमण को पैदा किया है जो धर्म की ध्वजा को जयवंत कर रहा है।
इससे बड़ा पुण्य और क्या होगा कि जिन महा आचार्य का नाम सिद्धों की श्रेणी में आने वाला है ऐसे महान संत का इस धरा पर प्रवास रहा
पडित श्री महावीर जैन जोबनेर तथा राजेश पंचोलिया ने बताया कि
नगर के लाड़ले जिन गलियों में घर पर रहे वहा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ,मुनि श्री हितेंद्र सागर जी सहित अनेक मुनियों,आर्यिका माताजी एवम क्षुल्लक जी के आहार हुए। संघस्थ क्षुल्लक श्री दीप्त सागर जी को आचार्य श्री ने मुनि दीक्षा देकर मुनि श्री दीप्त सागर नाम दिया गया।
पांचवे दिन आहार के बाद वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 10 मुनिराजो,19 आर्यिका माताजी एक क्षुल्लक एवम् एक क्षुल्लिका सहित 32 साधुओं का विहार बोली नगर से हुआ। लगभग 7 km बाद गंगवाडा ग्राम की स्कूल में रात्रि विश्राम हुआ।
दिनांक 22 दिसंबर की आहार चर्या ग्राम शिशोलाव में होगी
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिघि भक्त परिवार
संकलन
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
