संत का मन “बच्चे के समान निश्चल होता है,उसके मन में छल कपट, तिकड़म या कुटिलता जैसी कोई बात नहीं होती प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने मंगलवार की बेला में उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा किमोक्षमार्ग सहजता और सरलता का मार्ग है संत का मन “बच्चे के समान निश्चल होता है,उसके मन में छल कपट, तिकड़म या कुटिलता जैसी कोई बात नहीं होती लेकिन कुछ लोग तो गुरुओं के साथ भी तिकडम लगाने से नहीं चूकते” यह ज्ञान का दुरुपयोग एवं “प्रज्ञा अपराध” है जो भव-भव में आत्मा को भटकाती है।
मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने मोहताभवन रैसकोर्स रोड़ पर श्रावक संस्कार शिविर के तीसरे दिवस पर
उन्होंने कहा कि व्यक्ति जैसा अंदर से होता है बाहर से भी वैसा हो यह जरुरी नह़ी? आजकल व्यक्ति काल्पनिक जीवन जीता है,और जैसा अपने आपको मान रखा है वैसाअपने आपको दिखाना चाहता है, इसी काल्पनिक छवि को मेनटेन करने के लिये दूसरों धोखा देता है। मुनि श्री ने कहा यह उसकी भूल है,दूसरों के साथ छल कपट और धोखा दैने वाला व्यक्ति सबसे पहले अपने आपसे धोखा करता है उन्होंने कहा कि दूसरे की आंख में तो तुम बाद में धूल झोंकोगे पहले उसके कण तो आपकी आंखों में ही जाऐंगे
मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति पहले”स्वं” को धोखा देता है, इसके बाद स्वजनों को धोखा देता है, इसके बाद वह संतों को भी नहीं छोड़ता तथा समाज को भी धोखा देकर रफु चक्कर हो जाता है मुनि श्री ने कहा ध्यान रखना है जब पोलपट्टी खुलती है,तो
व्यक्ती कही का नहीं रह जाता वह अपने आपसे ही आंखें नहीं मिला पाता मुनि श्री ने कहा कि दूसरों के साथ छल कपट करने वाला व्यक्ती दूसरों को नहीं स्वयं को धोखा देता है,और बाद में

उसकी पोल पट्टी न खुले इसलिये अपने स्वजनों को धोखा देता

है। “गुरुओं के साथ मायाचारी करता है,तथा उनको प्रभावित करने के लिये,इधर की बातें उधर कर अपनी मान बढ़ाई करता है उन्होंने कहा कि “ज्ञान का “दुरुपयोग” ही “प्रज्ञापराध” है जो गुरुओं के साथ मायाचारी करेगा उसका अगली पर्याय में सुअर बनना तय है, उदाहरण देते हुये कहा कि एक व्यक्ति था जो कि अपनी दानशीलता के कारण बहुत छोटे से समय में वह प्रतिष्ठित हो गया समाज में दानशीलता की शुरुआत करके बाजार से 150 करोड़ का घोटाला करके गायब हो गया ऐसे लोग कितने जल्दी नीचे गिर जाते है,उन्हें नहीं मालुम कि वह अपने साथ कितना अन्याय कर रहे है यह “प्रज्ञापराध” भव भव में बन्धन का कारण है।
इस अवसर पर मुनि संघान सागर जी महाराज ने कहा कि “मन में हो सो वचन उचरिये वचन होये सो तन सौ करिये” इन दो पक्तियों में हीआज के पूरे प्रवचन का सार छुपा है इस अवसर पर मुनि श्री निर्वेग सागर जी महाराज प्रतिदिन श्रावको को प्रतिक्रमण के दौरान पाप से बचने का उपाय समझा रहे है।
उपरोक्त जानकारी देते हुये धर्म प्रभावना समिति के प्रचार प्रमुख एवं प्रवक्ता अविनाश जेन ने देते हुये बताया मोहताभवन में मुनिसंघ सानिध्य प्रातः5 बजे से भावनायोग तत्पश्चात 6 बजे से भगवान का अभिषेक एवं शांतीधारा एवं नित्य नियम पूजन के पश्चात 9 बजे से10 बजे तक प्रवचन तत्पश्चात दशलक्षण विधान प्रतिदिन भक्ती संगीत के साथ संपन्न हो रहा है।दौपहर 2:30 बजे से तत्वार्थसूत्र की वाचना एवं मुनिसंघ के प्रवचन तत्पश्चात5 बजे प्रतिक्रमण एवं6 बजे से 7:15 तक शंकासमाधान एवं आरती का कार्यक्रम होकर8 बजे समापन हो रहा है।
धर्म प्रभावना समिति के मीडिया प्रभारी राहुल जैन तथा प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मुनिसंघ के दर्शन एवं आशीर्वाद पाने के लिये विशिष्ट अतिथियों का आगमन हुआ धर्मप्रभावना समिति के अध्यक्ष अशोक डोसी, महोत्सव अध्यक्ष नवीन गोधा,महामंत्री हर्ष जैन आनंद गोधा सहित पदाधिकारियों ने शाल श्री फल से उनका स्वागत किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
