कुएँ में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती है,तो वह भर कर बाहर निकलती है..!जिन्दगी का भी यही गणित है, जो झुकता है, वही प्राप्त करता है।अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
कुलचाराम हैदराबाद
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहाकुएँ में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती है,तो वह भर कर बाहर निकलती है..!जिन्दगी का भी यही गणित है, जो झुकता है, वही प्राप्त करता है।प्रभु के चरणों में अगर कुछ चढ़ाना ही है तो –अपने आप को चढ़ाओ,अपने अहंकार को चढ़ाओ।अपने ममकार को चढ़ाओ, अपनेक्रोध को चढ़ाओ, अपनी माया को चढ़ाओ,
अपनी वासना को चढ़ाओ,
महाराज श्री ने कहा प्रभु के चरणों में, अहंकार से बड़ी भेंट और क्या हो सकती है-?* आदमी बड़ा बेईमान है। सब कुछ सुनाने को राजी तो हो जाता है, लेकिन अहंकार को चढ़ाने में बड़ी मशक्कत दिखाता है। सब चढ़ाकर भी अहंकार को बचा ही लेता है। 
उन्होंने इस बात पर ध्यान आकृष्ट किया की ध्यान रखना! अहंकार की कार में सवार होकर, आज तक कोई भी स्वर्ग में, प्रभु के राज्य में नहीं पहुँच पाया। वहाँ तो विनम्रता का विमान ही प्रवेश कर पाता है।अहंकार के नारियल को एक बार प्रभु के चरणों में, गुरु सद्गुरु के चरणों में, पटक पटक कर फोड़ डालो।






फिर देखो, जीवन में कैसा अतिशय, कैसा चमत्कार प्रगट होता है…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
