वर्तमान में जिए और व्यवहार उचित रखें आदित्य सागर महाराज
कोटा
रिद्धि सिद्धि नगर में मंगल प्रवचन देते हुए पूज्य मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने कर्म के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य के अंदर गुण व अवगुण दोनों होते हैं।
जब आप गुणों को देखते हैं तो मित्रवत और जब अवगुणों को देखते हो तो शत्रु के समान व्यवहार करते हो। आपके कर्म ही आपके शत्रु व मित्र हैं। महाराज श्री ने कहा कि व्यक्ति को पूर्व जन्मों का कुछ याद नहीं, भविष्य में क्या होगा यह भी पता नहीं इसीलिए वर्तमान में जिए और व्यवहार उचित रखें।






उन्होंने कहा क्योंकि शत्रु मित्र और मित्र कब शत्रु बन जाए यह किसी को नहीं पता बबुल के पेड़ में कांटे होते हैं, लोग उसे दूर रहते हैं। परंतु उसके औषधीय गुण हैं। यदि आप किसी के गुणों को नहीं देख पा रहे तो यह आपकी समस्या है। अपनी चिंतन की धारा को बढ़ाएं और अपना नजरिया बदलेंगे तो आपको गुण दिखेंगे। सभी में गुण व अवगुण विद्यमान है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
