सारी दुनिया को जान लिया तो भी कुछ नही जाना और खुद को जान लिया तो सब कुछ जान लिया! स्वस्ति भूषण माताजी
केशोरायपाटन
शनिवार की पावन बेला में पूज्य गुरु मां स्वस्ति भूषण माताजी ने मंगल उद्बोधन में जीवन में खुद को जानने की सीख देते हुए कहा कि पृथ्वी पर अनेक प्रकार की मिट्टी है! मुख्यत: 36 प्रकार की कही है! मिट्टी का भी प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है!
जैसे जहां की लाल मिट्टी होती है वहां के लोग अधिक लड़ाकू होते है! जहां काली मिट्टी होती हैं वहां के लोग अधिक सेवा भावी होते हैं जहां की मिट्टी हरी होती है वहां के लोग शांत प्रवृति के होते हैं! ऐसे ही पृथ्वी पर जल भी अनेक प्रकार का है! लेकिन सभी जगह के पानी में भी अलग अलग गुण हैं! कहीं का पानी बहुत मीठा है तो कहीं का पानी बहुत खारा है! सभी जगह के पानी के अलग अलग गुण अलग अलग विशेषता है! वैसे ही पृथ्वी पर मनुष्य तो सभी हैं जैसे राजा सेठ मंत्री भिखारी आदि! पर गुण सभी में अलग अलग हैं!
माता जी ने बताया कि वायु है तो आयु है!* वायु में 22% ऑक्सीजन होती है! जिससे हमारा शरीर जीवित रहता है! शरीर इसलिए कहा है क्योंकि आत्मा का स्वभाव मरना नहीं है! आत्मा का स्वभाव तो अजर अमर है! शरीर के मरण होने से आत्मा का मरण नहीं होता!





माताजी ने कहा कि आज कल बच्चों के थोड़े से नम्बर कम आ गए तो डिप्रेशन में चले जाते हैं! आत्महत्या कर लेते हैं! याद रखना सारी दुनिया को जान लिया तो भी कुछ नही जाना और खुद को जान लिया तो सब कुछ जान लिया! संसार का कितना भी ध्यान कर लेना संसार की तरफ ही ले जायेगा! लेकिन धर्म का थोड़ा सा भी ज्ञान आपको मोक्ष की ओर ले जायेगा!
चेतन जैन केशोरायपाटन से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जेन लुहाड़िया रामगंकमंडी की रिपोर्ट 9929747312
