मंदिर समोशरण का प्रतीक हैपरम पुज्य मुनि श्री पुज्य सागर जी महाराज
इंदौर।
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागरजी महाराज के चातुर्मास के धर्म प्रभावना रथ के तीसरे पड़ाव के पांचवे दिन भक्तामर महामंडल के तीसरे दिन विधान में अर्घ्य चढ़ाकर भगवान आदिनाथ की आराधना की गई।
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि विधान प्रारंभ होने से पहले भगवान अभिषेक, शांतिधारा की गई। अभिषेक,शांतिधारा करने का लाभ विधान के मुख्य पुण्यार्जक निर्मल, आकाश, राजुल, विकास, रेखा, गीतांश, गतिक, भविक, हितिका पांड्या परिवार, गुमास्ता नगर को प्राप्त हुआ।
तीसरे दिन चार काव्य की आराधना करते हुए 224 अर्घ्य समर्पित किए गए तीन दिन में कुल 672 अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान 28 अगस्त तक चलेगा।






सभा में चित्र अनावरण और दीप प्रज्वलन मुख्य पुण्यार्जक द्वारा किया गया। मुनि श्री का पाद पक्षालन राजेंद्र सोनी मल्हारगंज द्वारा किया गया। शास्त्र भेंट प्रेमलता पाटनी, गरिमा पाटनी खातेगांव द्वारा किया गया। सभा में उपस्थित सामाजिक संसद के कोषाध्यक्ष राजेंद्र सोनी का स्वागत कमलेश जैन द्वारा किया गया।
मुनि श्री ने कहा की मंदिर वह स्थान है जहां पर पापमल धोया जाता है । मंदिर समवसरण का प्रतीक है जहां जाने पर प्राणी मात्र के अंदर करुणा दया प्रेम वात्सल्य का भाव जागृत हो जाता है शत्रु के देखने पर भी वह उसे मैत्री भाव करता हुआ भगवान की आराधना करता है। मंदिर संस्कार संस्कृति का केंद्र है जहां पर हम अपने प्राचीन संस्कृति और संस्कारों को सीखते हैं जहां से हमें परिवार में प्रेम, स्नेह करने का संदेश मिलता है। मंदिर वह स्थान है जहां पर बैठकर के अनंत अनंत भव के पाप भी क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं ।
आज हम देख रहे हैं की लोग कहते हैं मंदिर जाने से क्या होता है मैं उन्हें कहना चाहूंगा कि मंदिर वास्तु ज्योतिष के आधार पर बनता है जिसके कारण वहां की ऊर्जा सकारात्मक होती है और हमारे अंदर एक नहीं चेतना जाग्रत करती है जिसके माध्यम से हम अपने भावों को अपने विचारों को पवित्र करते हैं। घर संपूर्ण वास्तु ज्योतिष से नहीं बनता है इससे वहां पर बैठकर के साधना करने से साधना का संपूर्ण फल हमें प्राप्त नहीं होता है। जिस प्रकार से कपड़ों को धोबी घाट पर धोया जाता है। रोगी का इलाज अस्पताल में होता है उ
सी प्रकार से इंसान के शारीरिक, मानसिक, आर्थिक रोगों के दूर करने के लिए मंदिर एक ऐसा स्थान है जिसे हम अस्पताल या धोबी घाट भी कह सकते हैं मंदिर हमें आपस में जोड़ने की शिक्षा देता है और जो मंदिर नहीं जाता है वह आपस में कभी एक दूसरे से जुड़े नहीं सकता है। उसके अंदर राग द्वेष के भाव निरंतर बनते रहते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
