विज्ञातीर्थ पर हुआ गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी के दीक्षा दिवस पर सहस्रनाम विधान
गुन्सी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज.) की पावन धरा पर प्रथम बार पूज्य गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी के 30 वाँ दीक्षा दिवस महोत्सव के पावन अवसर पर श्री जिनसहस्रनाम विधान का आयोजन हुआ। इस भक्ति को करने में भक्तों ने भगवान शांतिनाथ जी की दस शांतिधारा, दस श्रीफल, दस दीपक एवं विश्वशांति महायज्ञ के साथ भक्ति जिनसहस्रनाम मंत्रावली का आनंद लिया।
गुरुभक्त महेश मोटूका, हितेश छाबडा, शैलेन्द्र संघी, अशोक गंगवाल, धनराज बाकलीवाल, महेन्द्र गर्ग सपरिवार द्वारा इस विधान का आयोजन निर्विघ्न सम्पन्न हुआ। तत्पश्चात् गुरुभक्तों ने गुरुमाँ के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, वस्त्र भेंट एवं आहारचर्या कराने का परम सौभाग्य प्राप्त किया। इस गुरु उपकार दिवस के पावन अवसर पर आचार्य गुरूवर 108 श्री विराग सागर जी महामुनिराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।





गुरुभक्तों को दीक्षा का महत्त्व समझाते हुए माताजी ने कहा कि- दीक्षा अर्थात् चार चीजों को सुधारना जीवन में सुधारना। अपने जीवन की दिशा जो गलत मार्ग में जा रही थी उसे सम्यक मार्ग में लगाना ही दीक्षा है। 4 H का अर्थ है – Heart – हृदय, Head- बुद्धि, Hand – हाथ एवं Habit – आदतों को सुधारना ही दीक्षा जीवन को अंगीकृत करना है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
