एक रक्षासूत्र देश,समाज,परिवार के प्रति कर्तव्यों का, यही रक्षाबंधन की सार्थकता*

धर्म

*एक रक्षासूत्र देश,समाज,परिवार के प्रति कर्तव्यों का, यही रक्षाबंधन की सार्थकता*
रक्षाबंधन को सिर्फ बहन और भाई का त्योहार समझा जाता है। बहन के द्वारा भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र जिसे राखी कहा जाता है बांध कर सिर्फ एक परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। जबकि उस रक्षा सूत्र का बहुत बड़ा और गूढ़ अर्थ है की भाई बहन को यह वचन देता है कि मैं हमेशा तेरी रक्षार्थ तेरे साथ खड़ा रहूंगा, जब भी कोई संकट आएगा तो वह संकट बहन पर आने से पहले भाई के ऊपर से गुजरेगा और बहन भी वह रक्षा सूत्र बांधते हुए यह संकल्प लेती है कि भाई तेरी सुरक्षा पर आने वाले हर संकटों से मुक्ति का हर समय मैं उपाय खोजूंगी और उन्हें दूर करने का हर सम्भव प्रयास करूंगी।

 

 

 

रक्षाबंधन का व्यापक स्वरूप यदि देखें तो सीमा पर जाने वाले सिपाहियों को तिलक और रक्षा सूत्र बांधकर अलविदा किया जाता था। उनसे यह वचन लिया जाता कि तुम अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों को भी न्योछावर कर दोगे और किसी भी तरह मन में संशय उत्पन्न नहीं करोगे।

 

 

वर्तमान में भी आवश्यकता है कि हम रक्षासूत्र के इस अद्धभुत पर्व पर यह वचन ले कि हम अपने देश के स्वाभिमान व मर्यादा को अक्षुण्ण रखते हुए सदा देशभक्ति से ओत प्रोत रहेंगे। हमेशा निर्बल, असहाय की मदद,महिलाओं के सम्मान,बेटियों के मान,प्रकृति के प्रति समर्पण का भाव रखेंगे यही हमारा रक्षाबंधन पर्व है।

 

 

एक रक्षा सूत्र बांधते हैं अपने गुरुओं के प्रति आदर भाव का, जिस धरती मां ने हमें इतना सब कुछ दिया उसको संवारने का, अपने देश समाज परिवार के साथ खड़े होने का, एक रक्षा सूत्र बांधते हैं अबला, कमजोर, दुर्बल की रक्षा का,एक रक्षा सूत्र बांधते हैं ईमानदारी का जीवन हमेशा व्यतीत करेंगे तभी इस रक्षाबंधन पर्व की सार्थकता है। किसी भी पर्व की सार्थकता हो तभी वह पर्व मनाना चाहिए, अन्यथा परंपराओं के निर्वहन के लिए किसी पर्व को मनाए तो फिर वह केवल औपचारिकता है। औपचारिक जीवन नहीं वास्तविक जीवन जीना चाहिए यही भारतीय संस्कृति की निशानी है।

 

भारत की गौरव पूर्ण व विश्व को सिखाने वाली मर्यादित संस्कृति की रक्षार्थ,समाज परिवार के प्रति कर्तव्यों के पालनार्थ,कमजोर की सुरक्षार्थ व जीवन के मूल्यों के निर्वहनार्थ आओ रक्षा सूत्र के पर्व को मनाए।

सादर संजय जैन बड़जात्या कामां,राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री जैन पत्रकार महासंघ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *