भक्तामर प्रशिक्षण शिविर का हुआ शुभारंभ, जो सत्य का शंखनाद करते हैं वे होते हैं महान साधु गणिनी आर्यिका विज्ञमति माताजी

धर्म

भक्तामर प्रशिक्षण शिविर का हुआ शुभारंभ, जो सत्य का शंखनाद करते हैं वे होते हैं महान साधु गणिनी आर्यिका विज्ञमति माताजी
एटा
पुरानी बस्ती स्थित श्री दिगंबर जैन बड़े मंदिर में परम पूज्य भारत गौरव सम्यक शिरोमणि गणिनी आर्यिका105 श्री विशुद्धमति माताजी के मंगल सानिध्य एवं आशीर्वाद से भक्तामर प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका105 श्री विज्ञमति माताजी के संयोजन में प्रातःबेला में हुआ।
इस बेला में पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने भक्तामर स्तोत्र की महिमा को बताते हुए कहा कि भक्तामर महास्तोत्र जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान की आचार्य श्री मानतुंग स्वामी द्वारा सच्ची भक्ति पूर्वक स्तुति से ताले टूट गये और वह सकुशल कारागार से बाहर आ गए थे,यह जैन धर्म की प्रचलित पौराणिक कथाओं में एक है!उज्जैन के राजा भोज ने अहंकारी कवि कालिदास के कहने से कवि धनंजय से पराजित होते जानकर राजा से धनंजय के गुरु जैनाचार्य को राजदरबार में शास्त्रार्थ हेतु बुलाने को कहा,

 

 

आचार्यश्री ने कहा दिगंबर साधु का भला राज दरबार में क्या काम?वो तो सर्वस्व त्यागी होते हैं दिगंबर साधु किसी राजाज्ञा को नहीं मानते हैं,वह भगवान महावीर के शासनाधिकारी हैं वन में रहकर तपश्चरण करते हैं! राजा भोज ने आज्ञा न मानने पर मानतुंग आचार्य को हाथ पैरों में बेड़ियाँ डालकर 48 ताले लगाकर काराग्रह में डाल दिया था !आचार्य श्री आदिनाथ प्रभु की भक्ति में तल्लीन हो गए और एक-एक काव्य की रचना करते एक-एक ताले को भक्ति की चाबी से खोलते गए और काराग्रह से बाहर आ गए! राजा ने नतमस्तक होकर क्षमा मांगी यह है “भक्तामर स्त्रोत” महाकाव्य की भक्ति! 

पट्ट गणिनी आर्यिका विज्ञमती माताजी ने बताया विपरीत स्थितयों में उपसर्ग समझकर आचार्य श्री ने मौन धारण कर लिया चुप रहना किसी की कमजोरी नहीं जो सत्य का शंखनाद करते हैं वे महान साधु होते हैं ! भक्तामर शिविर संयोजिका पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने बताया की हमारे आचार्य गुरुओं ने पद नहीं पथ स्वीकार किया, जो पद पर रहता है वह भूत बनता है जो ज्ञानी आत्मा है वह अपने स्वभाव को पहचानता है! आचार्य श्री तो मोक्ष मार्गी थे उनकी भक्ति की शक्ति से एक-एक ताला टूटता गया और वह भक्ति में डूबते चले गए !अहंकारी व्यक्ति की विशेषता होती है वह दूसरों की यशवृद्धि सहन नहीं कर पाता जिसको घाव देता है उसको याद नहीं रखता जो घाव उसे दूसरे से मिलते हैं उसे याद रखता है ,श्रद्धा जितनी गहरी होती है भक्ति उतनी सम्यक होती है!

 

 

 

 

सायंकाल 48 दीपकों से भक्तामर दीप आराधना , गुरु भक्ति का भी कार्यक्रम हुआ! इस अवसर पर श्रीमान कुलदीप जैन, प्रदीप जैन, विनय जैन नितिन जैन निर्मल जैन राजीव जैन अशोक जैन शैलेंद्रजैन, श्रीमती कुमकुम जैन राजमती जैन शशि जैन बिंदु जैन उषा जैन पूनम जैन मंजू जैन प्रतिभा जैन सुनीता जैन रजनी जैन,सुव्रता जैन, समता जैन ,दिशा जैन सोनाली जैन प्रिया जैन आदि श्रावक मंदिर जी में उपस्थित थे!
बबिता जैन एटा प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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