गणिनी गुरु मां विशुद्ध मति माताजी का 24 वर्षों के बाद मंगल प्रवेश एवं नगर गौरव पट्ट गणिनी आर्यिका विज्ञमति माताजी का दीक्षा उपरांत नगर आगमन पर उमड़ा भक्ति का सैलाब

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गणिनी गुरु मां विशुद्ध मति माताजी का 24 वर्षों के बाद मंगल प्रवेश एवं नगर गौरव पट्ट गणिनी आर्यिका विज्ञमति माताजी का दीक्षा उपरांत नगर आगमन पर उमड़ा भक्ति का सैलाब
एटा
रविवार की प्रातः बेला आसमान में बादलों की ओट, प्राकृतिक सुहाना नजारा, दुल्हन सी सजी राहे, भक्ति में मगन श्रद्धालु गूंजते जयकारे सब कुछ अद्भुत था।

 

 

यह नजारा यह पल था भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी एवं नगर गौरव पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी के मंगल प्रवेश का पूज्य गुरु मां के चरण 24 वर्षों के बाद एटा की धरा पर पड़े तो वातावरण में गुरु मां की जय जैन धर्म की जय के जय कारे गूंज रहे थे।

 

शहर के आगरा रोड स्थित दखवानी रिसोर्ट पर जैन पंचायत समिति की ओर से भक्तों ने आर्यिका संघ की मंगल आगवानी की। इस स्थान से जुलूस के रूप में माताजी संघ को कचहरी रोड, जीटी रोड, घंटाघर, महावीर पार्क, विमर्श चौक होते हुए बड़े जैन मंदिर लाया गया।

 

 

 

इस मार्ग में जगह-जगह भक्तों ने रंगोली बनाई हुई थी। एवं गुरु मां की मंगल आगवानी के लिए भक्त उत्साहित नजर आए एवं गुरु मां के चरण पखार कर पद प्रक्षालन कर अपने आप को धन्य एवं गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। पूज्य गुरु मा विशुद्धमति माताजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांतों और उपदेशों को सभी आत्मसात करे। इस अवसर पर नगर गौरव पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने चातुर्मास का महत्व बताया।

 

प्रथम बार नगर ग्रह नगर आई पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी
जानकारी देते हुए जैन महिला संगठन की अध्यक्ष बबीता जैन प्रेरणा ने बताया कि आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी ने वर्ष 2000 में एटा में वर्षा योग किया था। तब उनके संघ में ब्रह्मचारिणी आभा जैन ने धर्म अध्ययन किया। इसके बाद वर्ष 2008 में आभा दीदी ने विजयदशमी को कोटा में आर्यिका दीक्षा ली और आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी बन गई। उन्होंने बताया कि वे 16 साल बाद पहली बार गृह नगर एटा आई है।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312

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