हमें अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए विज्ञानमति माताजी
बांसवाड़ा
जिन बुजुर्गों ने हमें बचपन में उंगली पड़कर चलना सिखाया हो, उनका हमेशा जीवन में सम्मान करो। खांदू कॉलोनी श्रेयांश नाथ दिगंबर जैन मंदिर में अपने मंगल प्रवचन में आर्यिका 105 विज्ञान मति माताजी ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि हमें बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। कुछ लोग अपने परिवार के वृद्ध जनों को कहीं साथ में लेकर नहीं जाना चाहते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि बुजुर्गों को साथ में ले जाने से हम खुलकर कहीं घूम फिर नहीं पाएंगे। और वह धीरे-धीरे चलते हैं, तो फिर गुस्सा आता है। इनके कारण हम लेट हो जाएंगे। जबकि वह व्यक्ति अपना बचपन भूल जाता है कि इन्होंने ही हमें उंगली पड़कर चलना सिखाया है। हमारे कारण अनेकों बार इन्हें अपने कई जरूरी कार्यों को टाला है। इसलिए हमें सदा अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए।





माताजी ने कहा कि दो व्यक्तियों के विचार कभी एक जैसे नहीं हो सकते। लड़ाई का सबसे बड़ा कारण ही अलग विचारधारा है। हर एक व्यक्ति अपने विचारों को दूसरों के ऊपर थोपना चाहता है। यदि वह विचारों को स्वीकार नहीं करता तो लड़ाई हो जाती है। हमें दूसरों के भी अच्छे विचारों का सम्मान करना चाहिए। हमें सदा सज्जन पुरुष और उनके विचारों के प्रति बहुमान रखना चाहिए। दुर्जन पुरुषों के साथ अपेक्षा भाग को धारण करना चाहिए।
माताजी ने कहा कि दुर्जन पुरुष खोटे विचार वाले होते है। उनके मन हमेशा दूसरों की प्रति बुरे विचार चलते रहते हैं। हमें दुष्ट पुरुषों के प्रति उपेक्षा का भाव धारण करना चाहिए। पर स्त्री पर नजर रखने वाले व्यक्ति की दुर्गति होती है। दूसरे की स्त्री पर व्यक्ति बुरी दृष्टि रखता है, तो वह संसार में कहीं भी सम्मान एवं विश्वास को प्राप्त नहीं कर सकता है। हमें दूसरों के धन पर भी बुरी दृष्टि नहीं रखनी चाहिए। धन दुर्गति का कारण है। व्यक्ति को धन प्रिय होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
