संयम का पालन करने वाले माता-पिता को संस्कारित बच्चे होते हैं निष्प्रहसागर महाराज
आष्टा
आजकल बहू बेटियों को पूर्ण आराम के बाद भी स्वस्थ बच्चे नहीं हो रहे, क्योंकि वह गर्भवती होने के पश्चात भी अपना अधिकांश समय मोबाइल, टीवी में व्यतीत करती हैं। इन दोनों के सामने नहीं बैठकर धर्म आराधना और विधान किया होता तो आपको भी निश्चित आचार्य विद्यासागर महाराज जैसे बच्चे पैदा होते, जो आपका व समाज का नाम गौरवान्वित करते। आज का यह मोबाइल युग आप सभी के साथ-साथ बच्चों के लिए काफी घातक है।
मोबाइल बनाने वाले व बड़े-बड़े लोग एंड्रॉयड फोन के स्थान पर कीपैड या लैंडलाइन फोन का उपयोग अधिक करते हैं। संयम का पालन करने वाले माता-पिता को संस्कारित बच्चे होते हैं। बच्चों को जन्म से ही मोबाइल से दूर रखें। धर्म तो जितना स्वयं में लाओगे उतना ही पुण्य अर्जन होता है। यह उद्गार पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय क्षेत्र पर मुनिश्री निष्प्रहसागर महाराज ने आशीष वचन देते हुए कही।

महाराज श्री ने कहा कि जो समय धर्म आराधना का है, उस दौरान व्यक्ति गलत काम में लगा हुआ है। वह अमानवीय कृत्य मे लगते हैं, सप्त व्यसन में लगते हैं तो वह अपने जीवन को बर्बाद कर रहे हैं। अहिंसा धर्म कहां टटोलेंगे, भगवान की प्रतिमा या शास्त्रों में। जो श्रावक अपना कर्तव्य समझते हैं वह अपना काम अवश्य करते हैं।

महाराज श्री ने कहा कि धर्म साधना आराधना करने के अनेक उपाय हैं। जैनत्व अभी का नहीं बहुत प्राचीन है। तत्वार्थ सूत्र के एक-एक पद में 100-100 ग्रंथ लिखे जा सकते हैं। शब्दों को गहराई से पढ़ो। भारतीय संस्कृति में ऐसे अनेक ग्रंथ लिखे गए।
मुनि श्री ने कहा कि खूब पढ़ने से ज्ञान अर्जित नहीं होता, बल्कि उस विषय पर मन लगाकर पढ़ाई करनी होगी। पहले बोध फिर शोध करना पड़ता है। मन हमे विचलित करता है, एकाग्रता नहीं करने देता है। भारत में सर्वाधिक सोना आज भी है। अंग्रेज हमारा सोना ही नहीं,इतिहास भी ले गए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
