आज अपनी जीवन शैली को बदलने का संकल्प लेने की आवश्यकता है वीर सागर महाराज
नेमावर
निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ने सोमवार की बेला में अपने मंगल प्रवचन में कहा कि साधु एकांत में रहकर साधना कर लेता है, लेकिन श्रावक जो घर गृहस्थी रहकर और व्यापार में उलझा रहता है। उसे अपने जीवन को ऊंचा उठाने के लिए सशक्त निमित्त की आवश्यकता होती है। इस निमित्त में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य जब युवा से प्रौढ़, प्रौढ़ से वृद्ध हो जाता है, शरीर में शक्ति रहती नहीं, तब उसे अहसास होता है, जीवन का पूरा समय परिवार में लगा दिया। खुद के लिए कुछ किया नहीं। भोगों को भोगते हुए घर परिवार की चिंता करते हुए जीवन ऐसे ही व्यतीत हो रहा है। पूरा जीवन काल ऐसे ही निकल गया।
उन्होंने कहा कि गुरु का सानिध्य मिलने पर भी व्यक्ति में सुधार नहीं हुआ तो जीवन किस काम का। जीवन को ऐसे मत बिता देना।

आज अपनी जीवन शैली को बदलने का संकल्प लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का समय जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने का समय होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
