जीवन के किसी भी पल में व्यक्ति वैराग्य उमड़ सकता है निष्पक्ष सागर महाराज

धर्म

जीवन के किसी भी पल में व्यक्ति वैराग्य उमड़ सकता है निष्पक्ष सागर महाराज
आष्टा
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि जीवन के किसी भी पल में व्यक्ति को वैराग्य उमड़ सकता है। तीर्थंकरों की वाणी अमृत के समान हैं। भक्ति के माध्यम से मुक्ति के दातार अरिहंतों की भक्ति करें तो सम्यकत्व रूपी रत्न की प्राप्ति होगी। लक्ष्य भक्ति रखने का हो, सिद्धत्व की प्राप्ति लक्ष्य हो। गुणों के प्रति अनुराग होना ही भक्ति है। भगवान अनंत गुणों की खान है।

 

 

भगवान आपके गुणों की भक्ति, प्राप्ति का भाव हम रखते हैं। महाराज श्री ने कहा कि आचार्य ने उपकार किया जो ग्रंथों मे सब कुछ लिखकर चले गए। शिक्षा के क्षेत्र में आज रेडीमेड जमाना है पहले किताबें पढ़ते थे, फिर कुंजी आ गई। फिर 2020 का जमाना आ गया। अपना 1 वर्ष बर्बाद कर रहे हैं बच्चे। तत्वार्थ सूत्र कुंजी का काम करता है।

आचार्य ज्ञान सागर महाराज जोहरी थे। 

 

 

 


पूज्य मुनि श्री ने दिव्योदय तीर्थ में आशीष वचन देते हुए कहा कि आचार्य ज्ञान सागर महाराज पारंगत थे। अपनी बागडोर एक युवा विद्यासागर महाराज को सोपी। जो उनकी परंपरा को ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। आचार्य ज्ञान सागर महाराज जोहरी थे। उन्होंने हीरे की पहचान की। ऐसे ही जौहरी आचार्य विद्यासागर महाराज भी थे।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *