रागी व्यक्ति अंधे से भी बड़ा अंधा है विज्ञानमति माताजी
बांसवाड़ा
श्रेयांशनाथ दिगंबर जैन मंदिर खांदू कॉलोनी में आर्यिका 105 विज्ञानमति माताजी के के द्वारा प्रतिदिन स्वाध्याय कराया जा रहा है। जिसमें 100 से भी अधिक लोग स्वाध्याय कर रहे हैं।
पूज्य माताजी ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि जीव के बिना कोई वस्तु का उत्पादन नहीं हो सकता, पंच स्थावर जीव के बिना इस सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती। हम व्यर्थ में घास पर चलते हैं, उखाड़ते है, उस पर कूदते हैं, जिससे बहुत जीवो का घात होता है। अतः हमें ऐसे जीव घात की क्रिया से बचना चाहिए।

माताजी ने बताया कि प्रश्नोत्तर रत्न मालिका के अंतर्गत उनके आचार्य गुरु कहते हैं कि अंधे से बड़ा अंधा कौन है फिर उसी का उत्तर देते हुए आचार्य कहते हैं रागी व्यक्ति अंधे से भी बड़ा अंधा है। क्योंकि रागी व्यक्ति को राग के कारण हित अहित कुछ नहीं दिखता वह आंख होते हुए भी राग के कारण कुछ भी नहीं देख पाता।
आचार्य कहते हैं शूरवीर कौन है, जो व्यक्ति संसार में नहीं फसा वही शूरवीर है। आलोचना पाठ के स्वाध्याय के अंतर्गत माताजी ने कहा कि हमारे द्वारा निरंतर एक इंद्रिय जीव का घात किया जाता है। हम घरों में जो व्यर्थ का सामान एकत्रित करके रखते हैं, जब उसकी सफाई की जाती है और सफाई में बहुत जीवो का घात होता है हमें इन सब से बचना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
