भक्ति कर्म काटने का सशक्त साधन है भावसागर महाराज
खिमलासा
परम पूज्य मुनि श्री 108 विमल सागर महाराज संघ सानिध्य में 28 जुलाई 2024 रविवार को श्री वर्धमान दिगंबर जैन मंदिर में अष्टमूलगुण संस्कार महोत्सव मनाया जाएगा। इसी क्रम में 27 जुलाई शनिवार दोपहर 2:00 बजे प्रवचन सभा बड़े मंदिर में 7 वर्ष 3 माह से लेकर अविवाहित बच्चों का चोटी सहित सामूहिक मुंडन होगा। बच्चों का हल्दी मेहंदी का कार्यक्रम सभी के अपने अपने घरों पर किया जाएगा।
आपको बता दें कि आचार्य जिनसेन प्रणीत हजार वर्ष प्राचीन आदि पुराण के अनुसार उपनीति क्रिया की जाती है। 27 जुलाई दोपहर 12:00 बजे तक इस हेतु रजिस्ट्रेशन भी किया जाएगा। 28 जुलाई रविवार को प्रातः 6:00 बजे से अष्टमूलगुण संस्कार की क्रियाएं प्रभु के मस्तक पर प्रथम धारा, अभिषेक,शांतिधारा, पूजन, मुनि श्री के प्रवचन के साथ यह कार्यक्रम संपन्न होगा जिसमें कई नगरों के बच्चे शामिल होंगे।
गुरुवार की अनुपम बेला में धर्म सभा में मुनि श्री 108 विमल सागर महाराज ने कहा कि हमेशा दान करने वाला होना चाहिए भोजन का एक हिस्सा अतिथि के लिए होना चाहिए। धर्मध्वजा खुद लेकर चलना चाहिए।

पूज्य मुनि श्री 108 भावसागर महाराज ने अष्टमूल गुण संस्कार का महत्व बताया उन्होंने कहा कि यह संस्कार जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार है। जिसमें बच्चे सदाचार से जीने में कुशलता धारण करना सीखते हैं। नशे से दूर रहते हैं। खोटी संपत्ति से बचते हैं। भक्ति कर्म काटने का सशक्त साधन है। भगवान के नाम स्मरण करने से पाप नष्ट हो जाते हैं। बहुमूल्यता आती है।
उन्होंने कहा कि बालक विवेक के अभाव में गुणहीन, ज्ञानहीन, सदाचार हीन, जीवन वाला होता है। मानव के व्यक्तित्व का विकास होना ही संस्कृति या संस्कार है। योग्यता को विकसित करने की क्रिया को संस्कार कहते हैं। दोषों को दूर करके गुणों को ग्रहण करना ही संस्कार है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
