मुनिश्री प्रभात सागर महाराज संघ एवम आर्यिका गुरु मति माताजी एवम गुणमति माताजी का हुआ मिलन। आचार्य श्री ने हम सभी को बच्चों की तरह उंगली पड़कर मोक्षमार्ग पर चलना सिखाया गुणमती माताजी

आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज

मुनिश्री प्रभात सागर महाराज संघ एवम आर्यिका गुरु मति माताजी एवम गुणमति माताजी का हुआ मिलन। आचार्य श्री ने हम सभी को बच्चों की तरह उंगली पड़कर मोक्षमार्ग पर चलना सिखाया गुणमती माताजी
दमोह
दमोह की दिगंबर जैन धर्मशाला में मुनि श्री प्रभात सागर महाराज के मंगल सानिध्य में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान में आर्यिका 105गुरुमति माताजी एवं गुणमति माताजी ससंघ का मंगल आगमन हुआ। ओर समाज के द्वारा माताजी संघ की मंगल अगवानी की गई।

 

 

जैन धर्मशाला पहुंचने पर आर्यका संघ ने भगवान के समशरण में दर्शन उपरांत मुनि संघ के दर्शन कर प्रदक्षिणा की एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। और महामिलन हुआ।

 

इसके पूर्व प्रातः काल श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा की गई शांति धारा करने का सौभाग्य देवेंद्र जैन लाट एवं श्रेयांश लहरी ,आनंद जैन के परिवार को प्राप्त हुआ शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य अभय जैन बनगांव को प्राप्त हुआ।

 

 

 

इस मौके पर अपने भाव व्यक्त करते हुए गुणमति माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री ने हम सभी को बच्चों की तरह उंगली पकड़कर मोक्ष मार्ग पर चलना सिखाया गुरु हमें मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं वे प्रेरणा देकर कठिन से कठिन मंजिल को पाने के लिए प्रेरित करते हैं गुरु गुण की खान होते हैं वह कोई वैज्ञानिक नहीं होते किंतु ज्ञान विज्ञान का उनके पास भंडार होता है उनका चरित्र शिखर की भांति उच्च होता है उनका हर शब्द प्रमाण बन जाता है जो जीवन उन्होंने जिया वह हमारे लिए एक आदर्श हो गया उन्होंने एक बागवान की तरह हम सबको संभाला गुरु स्वयं अपने व्रत का सजगता से पालन करते हैं और अपने शिष्यों को भी पालन कराते है।

 

 

गुरु के उपकारों को बुलाया नहीं जा सकता गुरुमति माताजी
इसके पश्चात आर्यिका 105 गुरुमति माताजी ने कहा कि गुरु के उपकारों को नहीं भुलाया जा सकता। उनके चरणों में अधिकांश जीवन का समय व्यतीत हुआ है उनके द्वारा जो हम सबको संस्कारों का बीजारोपण हुआ है वह अनंत काल तक चलने वाला है। आचार्य श्री एक अनुपम व्यक्तित्व थे उन्होंने आचरण से सम्यक दर्शन को जोड़कर सक्रिय सम्यक दर्शन को बताया जीवन से निराश लोगों के लिए हथकरघा का उपदेश दिया संघ को उन्होंने गुरुकुल बनाया अपने गुरु को दिए वचन को निभाया आचार्य श्री की शिक्षा ही अपने जीवन में उतारना सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।

आचार्य श्री दूसरों के लिए मुलायम एवं स्वयं के लिए कठोर थे प्रभात सागर महाराज
अंत में मुनि श्री प्रभात सागर जी महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि आचार्य भगवान अपने स्वयं के नियमों को कभी बताते नहीं थे उनकी चर्या में घटित होता था तभी सभी को पता लगता था वे दूसरों के लिए बहुत मुलायम किंतु स्वयं के लिए बहुत कठोर थे उन्होंने अंतरंग में संलेखना ले ली थी चौथे कॉल में मुनियों को 64 ऋद्धियां प्राप्त होती थी आचार्य श्री को भी ऋद्धियों से कम सिद्धियां नहीं थी उनके अनेक उदाहरणों से ऐसा ज्ञात होता है उन्होंने अपने अंतिम समय में साधुओं को अपनी सेवा से दूर रखा और सल्लेखना कर मुक्ति का द्वार देख लिया।विधान में रात्रि में महाआरती का सौभाग्य नेमचंद बजाज परिवार को प्राप्त हुआ इंद्र इंद्राणियों के लिए वात्सल्य भोजन का सौभाग्य राजेंद्र बमोरिया अभय बनगांव संदीप मोदी सत्येंद्र जैन डेरी परिवार को प्राप्त हुआ।

सुनील वेजीटेरियन से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312

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