क्या वात्सल्य है गुरुदेव कुंथुसागर जी महाराज का अद्भुत जैसे कोई पितामह अपने यशस्वी पौत्र को मिलता है , वैसे भाव वर्तमान के सबसे वरिष्ठ ज्येष्ठ आचार्य भगवंत का नवनायक गणाचार्य श्री को अदभुत वात्सल्यमयी शुभाशीष

धर्म

क्या वात्सल्य है गुरुदेव कुंथुसागर जी महाराज का अद्भुत जैसे कोई पितामह अपने यशस्वी पौत्र को मिलता है , वैसे भाव वर्तमान के सबसे वरिष्ठ ज्येष्ठ आचार्य भगवंत का नवनायक गणाचार्य श्री को अदभुत वात्सल्यमयी शुभाशीष

58 वर्षो से चीर दीक्षित जगतगुरु गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुंथुसागर जी ऋषिराज के मंगल दर्शन वन्दनार्थ विशाल संत संघ सहित पधारे गणाचार्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुराज

 

 

 

बड़े महाऋषि का अनूठा वात्सल्य, अहोभाव व गणाचार्य श्री द्वारा अथाह विनय ने विश्व के समस्त श्रावको को अभिभूत कर दिया जब कोई नवनायक व युवा आचार्य अपने से बड़े गुरु भगवंतो के प्रति इतना विनयवान होता है,दर्शन वंदन को लालायित रहता है तो वह साधक संघ हमेशा सनाथ रहता है,गुरुओं की छत्रछाया उन पर हर पल वरद हस्त रहती है।

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गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुंथूसागर जी भगवंत ने गणाचार्य श्री विशुद्धसागर जी के मस्तक पर पुत्रवत हाथ रखकर साधर्मी लघु साधकों के प्रति असीम स्नेह समर्पित किया

 

 

यह दृश्य आशा और विश्वास दिलाता है की वीरांगज मुनि के समय तक ” साधर्मी के वत्सलता बनी रहेगी ।*

*धन्य मुनिराज हमारे है,हमे प्राणों से प्यारे है*

शब्द सुमन – शाह मधोक जैन चितरी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 

 

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