जिस कार्य से आधायत्मिक सुख नही मिल रहा तो समझ लेना आप आधार्मिक है आचार्य कनकनंदी गुरुदेव

धर्म

जिस कार्य से आधायत्मिक सुख नही मिल रहा तो समझ लेना आप आधार्मिक है आचार्य कनकनंदी गुरुदेव

सागवाड़ा
योगेंद्र गिरि पर विराजमान समता शिरोमणि आचार्य श्री के08कनकनंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि पाप से दुख, धर्म से सुख यह सर्वजन प्रसिद्ध कथन है।फिर भी लोग पाप ही करते है। जिस कार्य से आध्यात्मिक सुख नहीं मिल रहा है तो समझना आप अधार्मिक हैं। यदि आध्यात्मिक सुख मिल रहा है तो कोई माने या न माने तो भी आप धार्मिक हो। धर्म से सुख कैसे प्राप्त कर सकते हैं इसका उदाहरण बताते हुए कहां की आग में गर्म पानी या ठंडा पानी कुछ भी डालें तो आग अवश्य बुझती है। आत्म सुख निर्मल सुख प्राप्त करना , चाहना धर्म है।

 

 

 

 

 

उदाहरण से बताया की नारियल छिलके सहित खाने पर दांत टूट जाते हैं छिलका निकालने पर नारियल मीठा लगता है। जिस प्रकार नारियल का कठोर भाग निकालना पड़ता है वैसे ही धर्म अधर्म सत्य असत्य का विश्लेषण करके धर्म को ग्रहण करना पड़ेगा तो सत्सुख मिलेगा। पापी पाप कार्य भी सुख प्राप्त करने के लिए करते हैं परंतु ऐसा होता नहीं है। सुख सब चाहते हैं। सर्वकर्म क्षय से आत्मा का अनंत सुख प्राप्त होता है। इसके लिए सदाचरण सम्यकज्ञान आत्मविश्वास आवश्यक है। धर्म कोई एक पंथ , रूढी, परंपरा से नहीं होता। जो आत्मविज्ञान है वह धर्म है। अध्यात्मिक ज्ञान सुख स्वरूप है लौकिक ज्ञान से सुख नहीं हैं। सती सीता को सेनापति ने जंगल में छोड़ा तब सीता राम के लिए संदेश भेजती है कि मुझे त्याग दिया उसका दुख मत करना राज्य भी त्याग दो तो भी दुख मत करना परंतु इसी तरह लोगों के भय से धर्म तथा सम्यक दर्शन को कभी त्याग मत करना क्योंकि धर्म ही सच्चा सुख देने वाला है।

विजयलक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *