जिस प्रकार ऑक्सीजन के बिना जीवन संभव नहीं है इस प्रकार संपूर्ण धार्मिक शिक्षा भी विनय के बिना निरर्थक है आचार्य कनक नदी गुरुदेव

धर्म

जिस प्रकार ऑक्सीजन के बिना जीवन संभव नहीं है इस प्रकार संपूर्ण धार्मिक शिक्षा भी विनय के बिना निरर्थक है आचार्य कनक नदी गुरुदेव
सागवाड़ा
ज्ञान विज्ञान दिवाकर वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नदी गुरुदेव का योगेंद्र गिरी पर केश लोचन अचार्य संघ की उपस्थिति में हुआ ब्रह्मचारी श्री सोहनलाल भया ब्रह्मचारी श्री खुशपाल भया ने भी लाभ लिया। आचार्य श्री की वेबीनार का प्रारंभ मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी द्वारा मेरा भाव दर्पण सम होय मेरा मन दर्पण सम होय जैसा भाव वैसा प्रतिबिंब झलकाय कविता पाठ से हुआ।

 

 

आचार्य श्री कनक नदी गुरुदेव ने वेबीनार में बताया कि जिस प्रकार ऑक्सीजन के बिना जीवन संभव नहीं है इस प्रकार संपूर्ण धार्मिक शिक्षा भी विनय के बिना निरर्थक है विनय विद्या अध्ययन का फल है अभ्युदय संसार के संपूर्ण सुख विनय से प्राप्त होते हैं विनय के बिना मोक्ष में प्रवेश नहीं है विनय तप है विनय से ज्ञान होता है विनय से संयम होता है विनय के कारण चक्रवर्ती भी तीर्थंकर की आज्ञा का पालन करते हैं विनय से आचार्य उपाध्याय भी अपने अधीन रखते हैं विनय से रहित भगवान के समवशरण मैं भी नहीं रह सकते आचार्य श्री अविनीत को संघ से निकाल देते हैं विनीत पशु पक्षी भी समवशरण में रहते हैं जैसे सड़े हुए कुत्ते को सभी निकाल देते हैं वैसे ही अविनीत को संघ से निकाल दिया जाता हैl विद्वान भी हो बाह्य तप भी करता हो परंतु विनय नहीं होने पर सभी जगह निष्कासित कर दिया जाता हैl यदि शिष्य पाप करें व गुरु दंड नहीं दे तो शिष्य के पाप का गुरु भी भागीदार होता हैl धर्म ज्ञान न भी हो परंतु विनय व अनुशासन में रहना आवश्यक हैl गुरु आज्ञा पालन नहीं करना सबसे बड़ा अपराध है शरीर का एक अवयव सड जाता है तो काट दिया जाता है एक फल सड़ जाता है तो टोकरी में रखे अन्य फल भी सड जाते हैं अतः इसे अलग कर दिया जाता है वैसे ही अनुशासन हीन विनय से रहित शिष्य दंडित अनुशासित किया जाता है दोष नहीं सुधारने पर संघ से निकाल दिया जाता है।

 

 

 

 

 


गुरु के सामने गवासन या सुखासन में बैठना चाहिए आचार्य श्री के आदेश निर्देश के अनुसार कार्य करना चाहिए गुरु की आज्ञा प्राप्त होते ही शिष्य को तत्काल कार्य कर देना चाहिए गुरु के बराबर या गुरु से अधिक ऊंचे नहीं बैठना चाहिए गुरु के सामने खड़े होकर हाथ जोड़कर या गवासन में बैठकर विनय से प्रश्न करना चाहिए शैया पर बैठे-बैठे आसन पर बैठे-बैठे प्रश्न नहीं करना चाहिए ऑक्सीजन का मूल्य घर रोटी कपड़े सभी सुख सुविधाओं से अधिक है वैसे ही विनय तथा समता का मूल्य सभी धार्मिक क्रियाओं से अधिक है
कर्म शत्रुओं को मारकर तीन लोक का स्वामी बनाने वाला धर्म है जनरल नॉलेज की कमी तथा अनुशासनविहीनता सभी भारतीयों की कमी हैl

विजयलक्ष्मी जैन सागवाड़ा से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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