जिन बातों से नकारात्मक सोच आता है बस उनको रोक लो फिर देखो परिणाम –मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज

धर्म

जिन बातों से नकारात्मक सोच आता है बस उनको रोक लो फिर देखो परिणाम –मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज
बांदकपुर
-जिन बातों से नकारात्मक सोच आता है बस उनको रोक लो, पॉजिटिव सोच तुम्हें कहीं से भी लाने की जरूरत नही, तुम्हारे अंदर खुदपांजिटिव सोच विद्यमान है। हम अधर्म को छोड़ते नही और धर्म करने लग जाते है, इसलिए धर्म करने में तुम्हे आनंद नही आता, तुम्हे फल भी नही मिलता, तुम्हे सिद्धि नही होती, फिर तुम धर्म से घ्रणा करने लगते हो। तुम अधर्म को त्यागे बिना धर्म की ओर बढ़ रहे हो, धर्म कोई चीज ही नहीं है, अधर्म के त्याग का नाम ही धर्म है। अहिंसा क्या है, हिंसा नही करना ही अहिंसा है तुम कितने पापी, रागी-द्वेषी हो, तुम अपनी किन आदतों से परेशान हो मन से वचन से काया से, उसको परखने का प्रयास करो और वह यदि तुम्हें पकड़ में आ गया, बस उसी में पूरी ताकत लगा दो कि मैं मन में यह विचार नहीं उठने दूंगा आपकी शक्तियाँ जागना चालू हो जाएगी, आपको सिद्धियाँ चालू हो जाएगी। क्योंकि आपने पकड़ लिया- मैं धर्म को जानता नही, मैं पाप को जानता हूँ, पाप से दुखी हूँ, इसलिए पाप को छोड़ता हूँ। धर्म को जानने की जरूरत नहीं, तुम धर्मात्मा बन जाओगे।

 

यह उद्बोधन परम पूज्य मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने द धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

 

 

उन्होंने कहा कि जैनियो के भगवान के पास कुछ भी नही है, न अस्त्र है, न वस्त्र है, न आभूषण है और वह जहां पहुंचते हैं, सबसे ज्यादा खर्च उन्ही पर होता है। भगवान जब बैठते हैं तो समवशरण में बैठते हैं, दुनिया में किसी के भगवानों के लिए इतना खर्च नहीं किया गया जितना जिनेन्द्र देव के लिए किया गया क्योंकि वो बहुत अच्छे है। जो जितना निर्मोही होगा, जितना वीतरागी होगा, दुनिया उससे उतना ही राग करेगी यह सम्यकदृष्टि का लक्षण है।सम्यक दृष्टि को उसे देखने में आनंद आता है जो किसी को नहीं देखता सम्यकदृष्टि उससे राग करता है जो किसी से राग नहीं करता, उससे बोलता है जो किसी से नहीं बोलता, उसकी छाया में जाता है जो किसी से मतलब नही रखता। संसार में सबसे ज्यादा जैनियों का भगवान है कुछ नही करता, आशीर्वाद भी नहीं देता, हाथ पर हाथ रख कर बैठता है और सबसे ज्यादा सम्यकदृष्टि उसी के पास जाता है जो आशीर्वाद भी नहीं देते सम्यकदृष्टि गुरु को परखेगा और जैसे ही उसे पता चलेगा कि मेरा गुरु सच्चा है, करुणा निधान है, वात्सल्य प्रेमी है, तारणहारा है। बस ऐसी प्रतीति होगी कि वो हाथ जोड़ेगा, गुरुदेव वो कौन सी दवाई या उपाय है जो उपाय आप अभी बोल रहे थे कि इस उपाय से मैं तुझे संसार सागर से पार लगाऊंगा। गुरु कहते है वह रत्नत्रय है।सम्यक दर्शन-ज्ञान-चारित्र की नौका में बैठ जा, रत्नत्रय को धारण कर ले, तेरा बेड़ा पार हो जाएगा।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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