प्रभाव परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी की पुस्तक स्मार्ट कोन में आलेखित लेख
पूज्य गुरु मां स्वस्ति भूषण माताजी द्वारा लिखित पुस्तक स्मार्ट कौन में प्रभाव विषय को बताया है।संसार में हर कोई अपना अपना प्रभाव दिखाना चाहता है। मौका मिलते ही अपनी कथनी करने का बखान प्रारंभ कर देता है। प्रभाव दिखाना मान कषाय का कारण है। गुणवान का प्रभाव वो ना भी चाहे तो भी हो सकता है। पर अवगुणी अपना प्रभाव दिखाने के लिए बड़ी-बड़ी सभाएं खराब कर देता है। बड़े-बड़े काम में अंतराय डाल देता है। केवल अपना प्रभाव दिखाने के लिए।
शादी होती है, तब फूफा जी अपना प्रभाव ना दिखाएं कैसे संभव है। अथवा और भी कोई रूठ के बैठ जाएगा मनाते रहो। ऐसे उसे अपने घर में कोई नहीं पूछता, पर ससुराल में शेर बन जाता है। मां कुछ काम कर रही हो, या किसी से बात कर रही हो, तो बच्चा हाथ खींचेगा, बाल खींचेगा, गाल खींचेगा, पहले मेरी सुनो। वह भी अहसास दिलाना चाहता है, मैं भी कुछ हूं।

कोरोना कल में महिलाओं ने खूब प्रभाव दिखाया। पति को बार-बार कहती थी, कहां से लॉकडाउन लग गया, मेरी तो आफत आ गई, सारे दिन इनके आगे, थाली, गिलास लेकर खड़े रहो। दिन भर उनकी फरमाइशे से पूरी करते रहो। बच्चों को सारे दिन ताने देती थी, दिन भर परेशान करते हो। घर में महिलाओं को मौका मिला है प्रभाव दिखाने, अहंकार का प्रभाव। जिन बच्चों से वह प्रेम करती है, जिससे शादी करके वह घर में आई, आज यदि साथ रहने का मौका मिला, तो परेशान हो गई। इसका मतलब उसे जिंदगी जीना नहीं आता है और इस लॉकडाउन में अनेक घरों में क्लेश और लड़ाइयां भी हुई है। पर यदि कोई समझदार महिला होगी, तो इस समय को सार्थक कैसे बनाना है मीठे शब्द से, समझदारी से वैसा कर लेगी। घर का माहौल नारी जैसा बनाना चाहे, वैसा बना सकती है।
सहनशीलता, विनम्रता, प्रेम, करुणा, दया से वह नारी, घर के प्रत्येक सदस्य के दिल पर राज कर सकती है। प्रभाव दिखाना अलग बात है, प्रभाव होना अलग बात है। सामने वाले से जोर-जोर से चिल्ला के बात करके प्रभाव जमाना अलग है कुछ बोला भी नहीं और सामने आपकी बात सुनने की इंतजार में है, यह बात अलग है।
भोजन बनाना नारी के लिए एक विशेष गुण है। पर एहसान जता के खिलाती, गुस्सा करके खिलाती, चिड़चिड़ाती है, ऐसा भोजन, भोजन नहीं जहर बन गया। घर वालों को स्वस्थ रखना है, तो प्रसन्न होकर बनाओ। भक्तामर मोबाइल में चालू कर दो, ताकि भोजन भी मंत्रित होकर अमृत बन जायें। खिलाते समय चेहरे पर मुस्कुराहट अवश्य होनी चाहिए। बाकी समय चाहे ना मुस्कुराओ, पर भोजन परोसते समय प्रसन्न मुद्रा में रहो तो भोजन करने वाले के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है।
न अभाव में जियो,न प्रभाव में जिओ
जीना है तो अपने स्वभाव में जिओ।
स्वस्तिभूषण माताजी की पुस्तक स्मार्ट कोन से आलेखित लेख
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
