मुस्कान से जिनके खिल जाए कलियां।
जी हाँ यह शब्द इसीलिए कहा गया है कि जो यथार्थ परिलक्षित करता नज़र आता है जब 20 जनवरी की बेला गुरुवार का पल जब मुनि द्वय विनीत सागर महाराज, चन्द्रप्रभ सागर महाराज गुरु चरणों में पहुंचे तो कवि अजय अहिंसा के बोल शाश्वत सत्य को बता गए
मुस्कान से जिनके खिल जाए कलियां चरण जिनके बतलाए जन्नत की कलियां
ये सागर से गहरे हिमाचल से ऊंचे इन्हें कोन बांधे इन्हें कोन रोके
जब गुरु की मुस्कान मुनि द्वय पर पड़ी उनके मुख की छवि एक अलोकिक छाप दे रही थी। गुरुकुल की शिष्य मंडली एक नया उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। जो हम प्राचीन ग्रन्थों पुराणों में पढ़ते है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
