दुख का सबसे बड़ा कारण मोह है स्वस्ति भूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में गुरुवार की बेला में कहा कि दुख का सबसे बड़ा कारण मोह है। उन्होंने कहा कि जीवन में अगर सुख चाहिए तो त्याग की भावना रखनी होगी।
माताजी ने आगे कहा कि जितनी भी अशुद्धि आई है, वह हमारे ज्ञान से है। मोह ने ज्ञान को भ्रमित कर रखा है। मोह जो मेरा है ही नहीं उसको भी अपना मान रखा है। माता-पिता वस्त्र, मकान, सोना, चांदी यह सब मोह के ज्ञान के कारण है। जबकि मनुष्य को पता है कि जन्म के समय वह खाली हाथ ही आया है, लेकिन अज्ञान के कारण व्यक्ति मोह के जाल में फंसा रहता है। हम मोह के कारण ही कषाय पाप कर रहे हैं। मोह और ज्ञान को अलग कर दिया जाए तो कुछ बचेगा ही नहीं।
हमने जो आंखों से देखा है, कानों से सुना उसको ही प्रमाण मान लिया, लेकिन आंखों से देखने के लिए उजाला चाहिए। कई बार मनुष्य मोह के माया जाल में ऐसा उलझा रहता है उसे कुछ दिखता नहीं है। संपत्ति वह मोह दोनों अलग-अलग हैं।



जो मनुष्य धनी है, वह उसके पूर्व जन्म की पुण्य कर्मों का प्रभाव है। धन संपदा ऐसे ही नहीं मिलती है। लेकिन मोह संसार बंध का कारण है। दिनभर किए पापों की प्रक्षालन के लिए हमें प्रतिक्रमण करना चाहिए। हमारे द्वारा जाने अनजाने में जो पाप हो गया हो, किसी जीव का घात हो गया हो, किसी से गलत बोल दिया, व्यवहार से किसी को दुख पहुंच गया, इसी शरीर के लिए भोजन, जलवायु आवश्यक है, वैसे ही पापों के क्षय के लिए प्रतिक्रमण जरूरी है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
