आचार्य श्री समय सागर महाराज संघ सानिध्य में आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज का समाधि दिवस कुंडलपुर तीर्थ में मनाया गया
कुंडलपुर
परम पूज्य आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज सानिध्य में आचार्य गुरुवर ज्ञान सागर महाराज का समाधि दिवस मनाया गया। इस क्रम में सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा की गई। एवं आचार्य गुरुवर का पूजन किया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए पूज्य गुरु मां गुरुमति माताजी ने आचार्य ज्ञान सागर महाराज की जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि आज का यह पर्व जीवन में धर्म रूपी शिखर पर कलशारोहण के समान है।





जब मंदिर होगा तो उस पर शिखर होगा, शिखर होगा तो उस पर कलशारोहण भी आवश्यक है। जिन महान आत्माओं ने आज तक जिस रत्नत्रय रूपी धर्म को धारण किया है उनके जीवन में वह शिखर का निर्माण हुआ है। उन्होंने कलशारोहण किया है। आज उनका 51 वा समाधि दिवस महान पर्व है।
इस पुनीत बेला में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 अभय सागर महाराज ने भी आचार्य ज्ञान सागर महाराज की जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला। पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 नियम सागर महाराज ने कहा की सल्लेखना मरण का प्रसंग है। अन जीवों के लिए अनिवार्य आवश्यक विशेष मरण है जिस मरण को वह साधक अपने जीवन को त्याग और तपस्या के मार्ग पर समर्पित करता है। निर्यापक मुनि श्री योगसागर महाराज ने कहा कि आज पावन पर्व है, महोत्सव है। आज तो मृत्यु महोत्सव है। जिन्होंने अपने जीवन में जिनवाणी की आराधना करते-करते मृत्यु महोत्सव मनाने का लाभ प्राप्त हुआ। आचार्य ज्ञान सागर महाराज का समाधि दिवस है।
आचार्य श्री समय सागर महाराज ने बोलते हुए कहा कि जिनके जीवन में वैराग्य के क्षण नही आते उनका उपादान बहुत कमजोर है, योग उपादान से ही कार्य संपादित होते हैं। शब्द कुछ नहीं करते, ऐसा नहीं किंतु शब्द एकमात्र माध्यम है। शब्द के माध्यम से अर्थ को गति मिलती है। शौक करने की आवश्यकता नहीं, जिसका मरण हुआ है, उसका जन्म हुआ है। किंतु मरण के उपरांत जन्म हो यह निश्चित नहीं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
