मुनि श्री प्रयोग सागर जी एवं मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज संघ एवम निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज का हुआ मंगल मिलन

धर्म

मुनि श्री प्रयोग सागर जी एवं मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज संघ एवम निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज का हुआ मंगल मिलन
दमोह
मुनि श्री प्रयोग सागर जी एवं मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज के कुंडलपुर से दमोह नगर आगमन पर समाज के द्वारा मंगल अगवानी की गई।

 

दमोह में पूर्व से विराजमान निर्यापक मुनि श्री वीर सागर जी निर्यापक मुनि श्री प्रसाद सागर जी मुनि श्री पदम सागर जी मुनि श्री शीतल सागर जी के साथ निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी सागर जी महाराज सैंडे चौराहे तक पहुंचे जहां पर सभी मुनि राज का ऐतिहासिक मंगल मिलन हुआ निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के साथ मुनि श्री प्रसाद सागर जी महाराज को दोनों मुनिराजों ने चरण वंदन करते हुए नमोस्तु किया।

 

इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालु गणों ने जयकारों के साथ हर्ष ध्वनि की इसके पश्चात ढोल नगाड़ों के साथ मुनि संघ जैन धर्मशाला पहुंचे जगह-जगह पर मुनि संघ का पद पक्षालन किया एवं आरती उतारी गई ।

 

 

इस अवसर पर निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि साधु का सबसे बड़ा लक्षण अपनी गलती को स्वीकार कर लेना है सज्जन व्यक्ति गलती होने पर क्षण भर में भी अपने जीवन भर की धारणा को पल में बदल देता है सज्जनता की परख इसी से होती है किंतु दुर्जन अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता दुर्जन को दूध पिलाना सांप को दूध पिलाने जैसा है

 

जो सत्य को जानकर भी स्वीकार नहीं करता वैराग्य हट बहुत दृढ़ होता है उसे कोई नहीं समझा सकता क्योंकि वह लोभी होता नहीं अज्ञानी होता नहीं और गलत होता नहीं वह इतना दृढ़ होता है की दुनिया हिल जाए किंतु बैरागी नहीं हिलता वह कितनी भी कठिनाई आए अपने पथ पर चलता रहता है क्षयौप्सम लब्धि सम्यक दर्शन प्रताप की योग्यता में होती है तो वह ऐसा ही हटी हो जाता है सम्यक दर्शन की प्राप्ति के लिए हमारे सभी इच्छाएं समाप्त हो जाना चाहिए

थोड़ी भी इच्छा होने पर छहउपसम लब्धि नहीं होती मुनि श्री ने कहा

 

 

 

 

कि इस पंचम काल में सभी प्रतिकूलताओं के बावजूद मुनिचर्या को पालना सबसे बड़ा अतिशय है।

 

मुनि श्री प्रयोग सागर जी अपनी बीमारी के बावजूद मुनि धर्म का सही पालन कर रहे हैं यह किसी चमत्कार से कम नहीं है यदि मेरी सारी उम्र की तपस्या की फल से ठीक होते हूं तो मैं देने को तैयार हूं पंचम काल में हीन संघनन के साथ मुनि क्रिया को पालना सबसे बड़ा चमत्कार है।

सुनील जैन वेजीटेरियन से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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