परम पूज्या पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी के प्रथम गणिनी पद दिवस पर भाव भीनी अभिव्यक्ति
जो ज्ञान ध्यान तक में दिन सदा रहती
त्याग तपस्या में सदा भीनी
समता रस का अनुपम मोती
नमन मां विज्ञमति
परम पूज्या पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी आज प्रथम गणिनी पद दिवस मना रहे है। माता जी की निष्काम साधना उनका तप अभूतपूर्व है। उन्होंने अनेक साहित्यों की रचना की धर्म की गंगा को पल्लवित किया यह कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं है उन्होंने भारत गौरव गणिनी आर्यिका विशुद्ध मति माताजी की जो सेवा की है वह किसी से अछूती नहीं है माताजी ने दिए हुए पद को पूर्णता के साथ निभाया है किसी भी तरह से हो उन्होंने धर्म को और उसकी प्रभावना को एक नई ज्योति एक नई दिशा देने का काम किया है चाहे वह गणघर स्त्रोत्र सेमिनार हो, मंडल विधान हो, व संघ की समस्त व्यवस्थाओं को संयोजित किया जो अपने आप में एक मिसाल है माताजी की सेवा निष्ठा की बड़ी माताजी ने भी जमकर तारीफ की है माताजी का जैसा नाम है वैसा ही इनका जीवन है यह विशिष्ट ज्ञान की धारी हैं ।
समता रस फुलवारी है
जैन जगत इनका आभारी है
साधना को देख हर कोई बस इनका हो लेता है
सर्वस्व समर्पित कर देता है
आज से 1 वर्ष पूर्व इतिहास के पन्नों में लिखा जाने वाला स्वर्णिम पल हो गया जिसका साक्षी मालपुरा नगर बना जब माता जी को गणिनी पद प्रदान किया गया।
हम सब मिल इनके गुण गाए
जय जय कार लगाएं
हम यही कामना करते हैं इनका संयम पद और पल्लवित हो
आप दीर्घायु हो चिरायु हो
कोटि कोटि नमन।
अभिषेक जैन लुहाडिया
रामगंजमंडी
