आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज श्रीसंघ का तपोभूमि पर हुआ भव्य मंगल प्रवेश ध्वनि का होना भाषात्मक है, भाषा और ध्वनि के भेद को समझें – आचार्य विशुद्ध सागर महाराज

धर्म

आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज श्रीसंघ का तपोभूमि पर हुआ भव्य मंगल प्रवेश ध्वनि का होना भाषात्मक है, भाषा और ध्वनि के भेद को समझें – आचार्य विशुद्ध सागर महाराज
उज्जैन |
जो श्रोता है वह परमात्मा है।जीवन संस्कृत हो, भाषा संस्कृत हो,
परिणाम संस्कृत हो, संस्कृत से तात्पर्य संस्कृत भाषा नहीं है जो व्याकरण से शुद्ध हो वही संस्कृत है। तुम्हारे पास वचन है, श्रावकों के पास वचन हैं।आवाज और वचन भाषा में अंतर समझो भाषा होना और ध्वनि होना में बहुत अंतर है।

 

ध्वनि के आलंबन सेव्यर्थ का बोध होता है भाषा के बौद्ध से संस्कार का बोध होता है। एक व्यक्ति की  भाषा उसके जीवन चरित्र को द दर्शाती है। जब तक विशुद्धता के भाव का भाषा से संबंध नहीं रहेगा जब तक जिनवाणीका बोध नहीं होगा।

 

जैन आगम के अंदरयंत्र, तंत्र, मंत्र न खोजें बल्कि भाषा के शुद्ध विशुद्ध और  मर्म को समझें और अपने जीवन का कल्याण करें।


यह बात पट्टाचार्य पद के बाद प्रथम बार उज्जैन नगर आगमन पर आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज ने इंदौर रोड स्थित श्री महावीर 
 तपोभूमि में शनिवार को प्रवचन में कही। उन्होंने कहा भावों की अभिव्यक्तिका साधन भाषा है। यदि कोई गाली देता है तो आपके अशुभ परिणाम होने लगते हैंऔर यदि कोई अच्छा कहता है तो मन को सुकून मिलता है।

 

जिस प्रकार मुद्रा कामहत्व होता है, भारत की मुद्रा संपूर्ण भारत
में चलती है उसी प्रकार दिगंबर मुद्रा एवं प्रत्येक मुद्रा चाहे वह हाथ से बताने वाली मुद्रा हो या फिर कुछ समझने के लिए समझाई गई मुद्रा हो, हर मुद्रा से व्यक्ति के व्यक्तित्व का पता लगता है। नन्हा सा 
बालक भी हाथों से बजाई हुई चुटकी या खिलौने की मुद्रा से सबकुछ समझ सकता है और नोटों की मुद्रा को हर व्यक्ति समझता है। इस प्रकार भगवान की मुद्रा देखकर आत्म शुद्धिकरण का बोध होता है। आप मुझे नहीं भगवान की मुद्रा को देखो, वही मुद्रा सर्वमान्य है भा भगवानकी प्रत्येक मुद्रा हमें संपूर्ण ज्ञान देती है।

आचार्य विशुद्ध सागर महाराज संघ के साथ पट्टाचार्य उपाधि के बाद
प्रथम बार उज्जैन आगमन से संपूर्ण समाज में हर्ष है। सुबह 6 बजे से ही इंदौर रोड पर हजारों भक्तों ने उपस्थित होकर आचार्य श्री को संघके साथ तपोभूमि में मंगल प्रवेश कराया। इस दौरान बैंड-बाजे, धर्मध्वजा के साथ महिलाएं सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं।

जगह-जगह आचार्यश्री के पादप्रक्षालन किए गए। तपोभूमि में प्रवेशके साथ ही आचार्यश्री संघ ने सभीमंदिरों के दर्शन किए। श्रीजी काअभिषेक एवं शांतिधारा कराई।

आचार्यश्री ने तपोभूमि में ग्रंथालय का अवलोकन किया दोपहर में तत्व चर्चा समाज को विशेष आशीर्वाद और गोशाला का निरीक्षण भी किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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