स्वयं सुधर गए तो दुनिया अपने आप सुधर जाएगी स्वस्ति भूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने संगति का जीवन में बहुत बड़ा प्रभाव बताया
उन्होंने कहा कि हमारी संगति का हमारे जीवन पर अधिक प्रभाव पड़ता है, एक लोकोक्ति को बताते हुए माताजी ने कहा कि जैसी संगत वैसी रंगत, पूज्य गुरु मां ने आगे कहा कि हम सोचते हैं कि हमें किसी से क्या मतलब, हमारा जो मन करेगा हम वही करेंगे लेकिन ऐसा नहीं है। एक का प्रभाव दस पर पड़ता है। 10 का प्रभाव सो पर सो का प्रभाव हजार पर हजार का लाखों पर, लाखों का करोड़ो पर करोड़ों का प्रभाव पूरे देश दुनिया पर पड़ता है।





हम हमेशा दूसरों को सुधारने में लगे रहते हैं, जबकि आवश्यकता स्वयं को सुधारने की है। स्वयं सुधर गए तो दुनिया अपने आप सुधर जाएगी। क्योंकि हमारे पहनावे, हमारे खान-पान, रहन-सहन, इन सब बातों का दूसरों के ऊपर काफी प्रभाव पड़ता है।
माताजी ने महात्मा गांधी के जीवन का एक संस्मरण सुनाया और बताया कि किसी महिला ने गांधी जी को कहा मेरा बच्चा गुड बहुत खाता है इसे मना कर दीजिए। गांधी जी ने बोला 7 दिन बाद आना, 7 दिन बाद जब वह महिला उनके पास पहुंची तो महात्मा ने बच्चों से कहा कि तुम गुड नहीं खाना तुम्हारे दांत खराब हो जाएंगे। महिला ने बड़े आश्चर्य से पूछा बापू इतनी सी बात को तो उसी दिन बोल सकते थे फिर 7 दिन बाद क्यों बुलाया, महात्मा ने बड़ा सरल जवाब दिया की 7 दिन पहले तक में भी बहुत गुड खाता था, इसीलिए पहले मैंने अपने आप को सुधारा। तब इस बच्चे को बोल सका। माताजी ने कहा कि शुद्ध शाकाहारी भोजन ही अच्छे मन, अच्छे विचारों का निर्माण करता है। शुद्ध मीठे जल से ही हमारी वाणी में मिठास आती है। जिसकी वाणी प्रिय वह निर्मल विचार वाली होती है वही शुद्ध आचरण वाला कहलाता है। जिसका ऐसा आचरण होता है। दुनिया उसकी पूरी दीवानी होती है। इन सबको करने के लिए अंतर की प्रेरणा आवश्यक है। मन से भावों में निर्मलता होनी चाहिए। धक्का लगाकर बिना मन से किया गया धर्म उतना फलदाई नहीं होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
