कंप्यूटर के युग में शरीर हार्डवेयर, भाग्य सॉफ्टवेयर है। सॉफ्टवेयर को सुरक्षित रखकर हार्डवेयर को दुष्प्रभावों से बचाए प्रमाण सागर महाराज
सागर
रविवार की बेला में नमक की मंडी दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि सही निर्णय लेने की कोशिश करना चाहिए। सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ हरि सिंह गौर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए महाराज श्री ने कहा कि मैंने उनकी जीवनी में पढ़ा है कि वह एक बैरिस्टर थे और वकालत के दौरान वह कभी कोई केस नहींहारे।
एक बार एक केस के बहस के दौरान भूलवश डॉक्टर गौर बगैर फाइल पढ़े ही पहुंच गए। और अपने ही पक्षकार के खिलाफ जमकर बोलने लगे। जब मुंशी ने गोर साहब को इशारे से बताया कि व





अपने पक्षकार के ही खिलाफ बात कर रहे हैं तो उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए एक गिलास पानी पिया और कहा कि योर ऑनर अभी तक मैंने जो बात कही है वह मेरे प्रतिपक्षी वकील कहेंगे। मैं उन सब बातों का खंडन करता हूं। और डॉक्टर साहब कैस जीत गए। यह आत्मविश्वास का चमत्कार है।
मुनि श्री ने कहा कि अपने जीवन को सफल बनाने के लिए गुरु चरणों में समर्पित होना चाहिए। आलोचना से विचलित न होकर समीक्षा करना चाहिए कंप्यूटर के युग में शरीर हार्डवेयर, भाग्य सॉफ्टवेयर सॉफ्टवेयर को सुरक्षित रखकर हार्डवेयर को दुष्प्रभाव से बचाए।
आज के वर्तमान परिपेक्ष पर बोलते हुए महाराज श्री ने कहा कि पहले जितनी शांति थी अब उतनी अब नहीं है। क्योंकि पहले संपत्ति कम थी, आज से कई गुना ज्यादा है। पैसा कमाने की हवस में आदमी की शांति छीन गई है। शांति सुविधा में नहीं बल्कि साधना और संतुष्टि में है। आज की मनुष्य की स्थिति ऐसी है की उसे पता ही नहीं है कि उसे जाना कहां है। उद्देश्य विहीन मनुष्य का जीवन कुत्ते की भाती है, सिर्फ खाना पीना लड़ना और एक दिन मर जाना। इसी में सब की कहानी पूरी हो जाएगी। जीवन भर आपने सब अर्जित किया है लेकिन साथ में जाने वाला कुछ भी नहीं है। भारतीय संस्कृति में उसी जीवन को जीवन कहा गया है जिसमें शांति, तुष्टि, पवित्रता आनंद है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
