संयोग में सुख क्षणिक सूख मुनि श्री 108 शुद्ध सागर जी महाराज

धर्म

संयोग में सुख क्षणिक सूख मुनि श्री 108 शुद्ध सागर जी महाराज

बारां
अन्नपूर्णा नगरी शहर में आचार्य 108 विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य मुनि 108 शुद्ध सागर महाराज का सुबह की बेला में ढोल नगाड़ों के साथ नगर में हुवा मंगल प्रवेश, वही मुनि श्री की शहर में प्रवेश के साथ ही जगह जगह समाज बंधुओ द्वारा मुनि श्री का पाद प्रक्षालन व आरती की गई ,

 

 

वही समाज के अध्यक्ष विनोद बड़जात्या, मंत्री अनिल बड़जात्या व प्रवक्ता अमित जैन ने बताया कि मुनि श्री का विहार छबड़ा से बारां की ओर हुवा , मुनि श्री शुद्ध सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश बारां शहर हुवा, शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुवे मुनि श्री जैन जोड़ला मंदिर पहुचे, जहाँ मुनि श्री ने प्रभु दर्शन किये, ओर जैन जोड़ला मंदिर स्थित प्रशांत मति साभगार प्रवचन हुवे ,

प्रवचन में मुनि श्री शुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को जब संयोग होता है तो सुख होता है तो वही वियोग होने पर दुखी होता है, जब तक संयोग में सुख होगा तब तक मनुष्य सुखी होगा,

 

 

 

 

है प्राणी संसार में आदमी कब तक जब तक तुजे संसार मे संयोग सुख मिले तब तक, क्योंकि आज तक एक भी द्रव्य का दूसरे द्रव्य से संयोग हुआ ही नहीं, और जब जब एक द्रव्य का दूसरे द्रव्य से संयोग हुवा है, तब तब नियम से उस द्रव्य की दुर्गति हुवी है, मुनि श्री ने बताया की जिस प्रकार से चाय बनती है तो हमें बड़ा मजा आता है कि चाय बन गई कितनी अच्छी चाय है, कितनी अच्छी खुशबू है , मगर है प्राणी तुझे उस चाय में सुख दिख रहा है , पर उस चाय से तो पूछ जिस में दूध, शक्कर ,पानी , चाय पत्ती सब मिल गए तो उस चाय की तो दुर्गति हो गयी, तुरंत पीवो तो उस की कीमत है और सुबह बनावो ओर शाम को पीवो तो उस का मजा ही समाप्त हो गया,

 

तभी तो प्राणी संसार मे संयोग का सुख क्षणिक मात्र ही है ,जो भी संयोग से पाता है वह मात्र क्षणिक सुख है ,संयोग का सुख नियम से दुर्गति का कारण है , द्रव्य सुख तब तक ही जब तक वो अकेला है , जब एक द्रव्य दूसरे द्रव्य के संयोग से मिला तो उस द्रव्य की मर्यादा खत्म हो गयी अतः प्राणी रहना तो अकेला ही पड़ेगा , सिद्धालय में अनेक सिद्ध भगवान रहते हैं फिर भी वह एक दूसरे से नहीं बोलते ना देखते हैं मगर है प्राणी तू घर में रहता है बोलेगा बात भी करेगा , राग भी रहेगा , एक दूसरे की इच्छाएं की पूर्ति भी करेगा ओर इच्छाओं की पूर्ति करेगा तो राग द्वेष भी होगा तो फिर प्राणी तो अकेला नहीं रह पाएगा , दो आएंगे तो अशुद्ध हो जाएगा, ओर इस लिए घर भी छोड़ना पड़ता है, इसीलिए संसार में कब तक जब तक संयोग में सुख है तब तक, जिस दिन तुम्हे लगे घर मे दुख लगे, अकेला लगने लगे समझ लेना उस दिन संसार छूट गया,जब संयोग में सुख लगे तो संसार लंबा है और जब संयोग में दुख लगे, ओर अकेला रहने का मन करे उस समय समझ लेना तेरा संसार छूटने वाला है संयोग में सुख संसार बड़ा है संयोग में दुख संसार अल्प है।इससे पूर्व मुनि श्री के विहार में धनेश गोधा , संजय गोधा, अंकित पाटनी, विनोद बड़जात्या, अमित जैन,अनिल बड़जात्या, जिनेश पाटनी, अंकित जैन, विवेक पाटनी, व कई समाज बंधु विहार में मुनि श्री के साथ चले

 

।संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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