मन को खुश रखना है तो प्रभु सेवा भक्ति में ध्यान लगाए स्वस्तिभूषण माताजी
केशोवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने उद्बोधन में प्रभु भक्ति पर जोर दिया।
पूज्य गुरु मां ने कहा कि अगर मन को प्रसन्न रखना है तो प्रभु की सेवा भक्ति में ध्यान लगाए। प्रभु की सेवा से कभी मन विचलित नहीं होता है।


माताजी ने आगे कहा कि इस बात को साइंस ने भी स्वीकार किया है। कई बार दवा से ज्यादा भक्ति का असर होता है, लेकिन भक्ति करने का भाव सही हो। भाव से ही भक्ति का महत्व है। कई बार कहा जाता है कि समय नहीं मिलता है। समय मिलता नहीं है समय तो निकालना पड़ता है। उन्होंने इस बात पर ध्यान इंगित किया कि कम से कम प्रभु की सेवा के लिए 10 मिनट तो निकाले एक लोकोक्ति को बताते हुए माताजी ने कहा कि मन चंगा तो कठोती में गंगा, मन तो हमेशा चंचल रहता है, जो प्रभु ने दिया उस पर संतुष्ट होना चाहिए। मन को भी पवित्र बनाना होगा।
उन्होंने संत रैदास की कथा के बारे में बताते हुए कहा की संत चमड़े का कार्य किया करते थे। लेकिन उनका मन पवित्र था। वे प्रभु की सेवा में लगे रहते थे। उनकी सेवा से गंगा भी उनके कमंडल में रहती थी। उन्होंने कहा कि मन की शुद्धि बहुत जरूरी है। मन शुद्ध नहीं है तो मंदिर आना भी बेकार है। इसीलिए पहले अपने आचरण को सही करना होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
