“मै कुछ हूँ”? यह तुम नहीं तुम्हारे अंदर का अहंकार बोल रहा है- मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज
भोपाल
“यह मंदिर मेरा है,यह मेरे भगवान है, मैं यहा का पदाधिकारी हूँ?मेरे बिना यहा का एक पत्ता भी नहीं हिल सकता,अक्सर देखने में आता है कि भगवान के चरणों में झुकने वाला व्यक्ति भी यह अकड़ रखता है किमैं भगवान का बहुत बड़ा भक्त हूं? उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने बाबड़िया कला दि. जैन मंदिर की धर्मसभा में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि “अहंकार” प्रभु चरणों में आने के पश्चात भी प्रभु का नहीं होंने देता,उन्होंने कहा कि ” हम ईष्ट के चरणों में भी झुकते अवश्य है लेकिन मन वहा पर भी अकड़ा ही रहता है”मैं यहा का पदाधिकारी हूं? यह मेरा मंदिर है,यह मेरे भगवान है, जब हम उसको पकड़ कर बैठ जाते है,तो सब कुछ करके भी अपने किये कराये पर पानी फेर देते है”

उन्होंने कहा कि “विनम्र व्यक्ति श्रद्धा शील होता है,वह किसी को झुकाता नहीं बल्कि स्वं झुक जाता है”* मुनि श्री ने चार शब्द- झुकना, झुकाना,मुड़ना,मोड़ना पर बात करते हुये कहा कि ” झुकने में उपलब्धि है,जबकि झुकाने में पीड़ा” संत कहते है अपने जीवन को आगे बढ़ाना चाहते हो तो झुकना सीखो ।



जो झुकना जानता है,सारी सृष्टि उसके चरणों में न्योछावर हो जाती है,
और जो औरों को झुकाना चाहता है,सृष्टि उसे उखाड़ कर फैक देती है,
हर आदमी अपने आपको सबसे ऊपर दिखाना चाहता है, मुनि श्री ने कहा कि “काल्पनिक छवि को अपनी मान लेना ही सबसे बड़ी अज्ञानता है”
मुनि श्री ने कहा “अहंकार की यह विशेषता है कि वह स्वं को झुकने नहीं देता भले ही वह टूट जाये”मैं क्यों झुंकू”यह जीवन की बहुत बड़ी विडंबना है,जो हमारे जीवन की समरसता को लील जाता है, जिसके जीवन में झुकने की कला आ जाती है उसका जीवन कभी रूकता नहीं मुनि श्री ने कहा कि कभी कभी तो बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है,एक दूसरे के साथ रहते है लेकिन एक पूरब है तो दूसरा पश्चिम “पति पत्नी” में अनबन हो गई और एक दूसरे से बातचीत करना बंद कर दिया पति सात बजे उठते थे और पत्नी प्रातः4 बजे, पति को किसी विशेष मीटिंग में जाना था और सुबह पांच बजे गाड़ी पकड़ना थी बोलचाल बंद थी सो पति ने एक कागज पर लिखा मुझे कल मीटिंग में अर्जेन्ट जाना है सुबह चार बजे उठा देना और पत्नी के तकिया के ऊपर पर्ची रख दिया पत्नी सुबह 4 बजे उठी और अपनी सामायिक कर गृहस्थी के कार्य में लग गयी। सुवह जब पतिदेव उठे घड़ी देखा तो सात बज गये वह बड़बडा़ए कि सुबह 4 बजे उठने को लिखा था और सात बज गये और जैसे ही उसने गुस्सा में अपना तकिया फैका तो एक कागज पर लिखा था 4 बज गये है उठ जाइये…
मुनि श्री ने कहा कि प्रतिदिन सामायिक करने वाली घरवाली होने के उपरांत भी यदि मन नहीं झुका और अपने आपको मोड़ने की कला सीख लें तो उसके जीवन में कभी संघर्ष और कटुता नहीं होती क्योंकि उसके अंदर स्वीकारता का भाव आ जाता है,मन को मोडना नहीं आया तो सब कुछ व्यर्थ है।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनिसंघ का मंगल विहार”संस्कार उपवन प्राईड” की ओर हुआ यहा पर तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम रहेगा। प्रातःप्रवचन 8:30 बजे एवं सांयकालीन शंकासमाधान 6:20 से संपन्न होगा
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
