अन्तर्मना उवाच* (13 मई!) जो समर्पण से मिल सकता है, वो अकड़ने से कभी नहीं मिल सकता..*

धर्म

*अन्तर्मना उवाच* (13 मई!) जो समर्पण से मिल सकता है, वो अकड़ने से कभी नहीं मिल सकता..*

*जो समर्पण से मिल सकता है, वो अकड़ने से कभी नहीं मिल सकता..*
*बड़ो के सामने बड़े बनोगे तो विरोध होगा, और*
*यदि छोटे बन जाओगे तो सब कुछ मिल जायेगा..!*

 

 

 

 

प्रभु की छाँव और गुरू की ठाँव बड़े नसीबों से मिलती है। *जिस पर प्रभु और गुरु कृपा बरस रही है वो किस्मत का धनी है।* अभागा वो नहीं जिस पर माँ बाप का साया नहीं है और ना वो अभागा है जिसके पास माया नहीं है, बल्कि सही अर्थों में वो अभागा है जिसके सिर पर प्रभु की कृपा और गुरू की छाया नहीं है। *

 

जिसकी जुबान पर प्रभु का नाम और गुरु का गुणानुवाद नहीं है या जिसके दिल में प्रभु की चाहत नहीं है और मन में गुरू की मूरत नहीं है, वो संसार का सबसे अभागा इंसान है।*

*बड़े-बुजुर्गों से केवल आशीषों की अपेक्षा रखो,*
*उनसे मान सम्मान की अपेक्षा रखोगे तो टकराव होगा..*
*जिससे सबकी मानसिक अशान्ति भंग होगी…!!!* नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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