क्षमा जीवन उत्थान का मार्ग है भावसागर महाराज
बांसांतखेड़ा
परम पूज्य मुनि श्री 108 भाव सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में क्रोध से दूर रहने के विषय पर जोर देते हुए कहा कि क्रोध सबसे बड़ी बीमारी है, इससे बहुत सी बीमारी होती है। परेशानियां आती है। इसको जीतने का उपाय है क्षमा।
उन्होंने कहा कि क्षमा जीवन उत्थान का मार्ग है, खुशहाली का खजाना है, परम सुख है, यही अंतिम सत्य है। आत्मज्ञान है। सभी भेदभाव मिटाता है, मोक्ष का दरवाजा है। सभी गुणों का दाता है। धर्म की जननी है, स्नेह की सरिता है। मोक्ष की प्रथम सीढ़ी है, आत्मा का आनंद है, जीवन निर्माता है। यह हृदय का धर्म है। इसी से व्यक्ति ऊंचा उठता है। इसी से शत्रु मित्र बन जाता है। इसकी पराजय नहीं होती, यह एक ऊंचा आचरण है। यह विश्व मैत्री का

संगीत है।

उन्होंने कहा अहिंसा का दूसरा नाम पवित्रता है। अहिंसा की हरियाली है, क्षमा वंदनीय है, क्षमा जिंदगी, क्षमा साधना, क्षमा प्रार्थना आदि है। क्रोध से मनुष्य की अंतस्त्रावी ग्रंथियो से विषाक्त द्रव्यों का स्राव होने लगता है। जो पूरे शरीर में फैलने लगता है। क्रोध को जीतने का उपाय क्षमा है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
