आकाश में उड़ने वालों को सोने के पिंजरे नहीं सुहाते प्रमाण सागर महाराज
गढ़ाकोटा
परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज की धर्म सभा क्षमा धाम प्रांगण में हुई। पूज्य मुनि श्री ने चार मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि मूल ,भूल, धूल,चूल का हमारे जीवन में क्या महत्व है उस पर श्रावकों से परिचर्चा की।
महाराज श्री ने कहा कि सबसे पहले मूल को जानो हम है क्या? जब खुद को जान गए तो आपकी चेतना का विकास होता है।






अपने आप को पहचानो केवल नाम और काम हमारा असली स्वरूप नहीं है। जन्म से नामकरण ही हो गया तो जानने लगे और अंत में जीवन से विरक्त हो जाओगे। यह रूप भी अपना नहीं है। मां के पेट से जन्म लेकर अंतिम चिता तक ही तुम्हारा रूप है। इसलिए अपने स्वरूप को पहचानो। कोई साधु कहे फिर भी हम कोई अकरणीय कार्य नहीं करेंगे। स्वरूप का बोध हमे अकरणीय
कार्य से बचाता है। मूल में रहोगे तो धूल खाओगे, मूल को भूल बैठे। चिड़िया है सोने की उड़ना भूल जा, तू उठ उड़ जा आकाश में। इसका भावार्थ समझाते हुए महाराज श्री ने कहा कि जो चिड़िया आकाश में उड़ना जानती है, उसे सोने के पिंजरे भी नहीं सुहाते। हम अपने दोष और दुर्बलता के कारण ही दुखी हैं। उन्होंने कहा कि जिसने मूल को सुधारा वह लोक चूल में मिल गए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
