जिस समाज में मूलनायक भगवान को महत्व नहीं दिया जाता वह समाज पिछड़ जाती है विमल सागर महाराज
बांसातरखेड़ा
श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर बांसातरखेड़ा में मूलनायक श्री पारसनाथ भगवान का महा मस्तकाभिषेक विशिष्ट मंत्र शांति धारा संपन्न हुई इसी के साथ पूजन भी किया गया। पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज, अनंत सागर महाराज, धर्मसागर महाराज, भावसागर महाराज के इस बेला में प्रवचन भी हुए। समाज जनों ने इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा की अवसर को लोग पहचान नहीं पाते हैं, अवसर जब आता है तो पंख लगा कर उड़ जाता है, लोग पछताते हैं कि मैं यह कार्य नहीं कर पाया।





यह स्वर्ण अवसर बार-बार नहीं आते। यहां की मुलनायक प्रतिमा के विषय में बोलते हुए कहा की यहां 175 वर्ष प्राचीन पारसनाथ भगवान की प्रतिमा है। यह अतिशयकारी है, मूल नायक महान होते हैं इनको बहुमान देना हमारा कर्तव्य होता है। जिस समाज में मूलनायक को महत्व नहीं दिया जाता है वह समाज पिछड़ जाती है। राजस्थान के घाटोल का जिक्र करते हुए महाराज श्री ने कहा कि घाटोल समाज ने मूल नायक श्री बासपूज्य भगवान को रजत बेदी पर विराजमान किया तो उनको सुख शांति समृद्धि प्राप्त हुई। मूलनायक को उत्साह आनंद के साथ महत्व दें तो ऊंचाइयों पर पहुंचोगे, उत्तम से उत्तम वस्तु चढ़ाकर, प्रभु की आराधना करना चाहिए।
इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने कहा कि जब महापुरुषों को विघ्न आए उन्होंने अभिषेक करवाया। महा मस्तकाभिषेक दुनिया का सर्वश्रेष्ठ अनुष्ठान है। इसके माध्यम से कई कार्य सिद्ध हो जाते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
