सच्चे धर्मात्मा सबको साथ लेकर चलते हैं आदित्य सागर महाराज
बूंदी
देवपुरा स्थित दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए श्रुत संवेगी मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने कहा कि जीवन में दया से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है, मन से दया करना ही सच्चा धर्म है, बाहरी दया दिखावा सच्चा धर्म नहीं है, वे सत्यार्थ धर्मात्मा को धर्मात्मा नहीं बनने देते हैं। सच्चे धर्मात्मा सबको साथ लेकर चलते हैं। जो कल्पना के धर्मात्मा होते हैं, वे केवल अपने आप को लेकर चलते हैं।
उन्होंने आगे प्रेरणा देते हुए कहा कि गुरु की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए जो गुरु की निंदा करते हैं वह दया विहीन लोग होते हैं। उन्होंने लक्ष्य को नहीं भूलने की बात करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों में संस्कारों की बहुत जरूरत है। बच्चों में धार्मिक संस्कार चाहते हो तो पहले स्वयं संस्कारवान बनना होगा। क्योंकि हमें देखकर ही वह सीखते हैं। इसलिए हमें अपने घरों से ही बच्चों को संस्कार देना शुरू करना होगा। उनको अच्छे और बुरे के बारे में बताना होगा।




महाराज श्री ने कहा कि हम सभी को विलासिता को छोड़कर सात्विक जीवन जीना होगा। सांसारिकता के बीच भी विलासिता से बचोगे तो साधक बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। जीवन में मजबूत लक्ष्य को बनाओ, लक्ष्य को भूलोगे तो साधना धूल में मिल जाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
