वर्तमान में जो परिपाटी चल रही है, वह धर्म के लिए सही नहीं है स्वस्ति भूषण माताजी
केशोरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने धर्मसभा में दिखावे की परिपाटी से दूर रहने पर जोर दिया इस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो दिखावे की परिपाटी चल रही है वह धर्म के लिए सही नहीं है।
बच्चों की और ध्यान आकर्षित करते हुए माताजी ने कहा कि आजकल बच्चे अपना जन्मदिन होटल में मना रहे हैं उन्हें होटल में जन्मदिन नहीं मना ना चाहिए जबकि मंदिर के अंदर धर्म करते हुए जन्मदिन मनाना चाहिए।






उन्होंने कहा कि बच्चों में भी पाश्चात्य संस्कृति का समावेश हो रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर किया गया खर्च कभी व्यर्थ नहीं जाता है। वह बीज का कार्य करता है। जबकि भोग पर किया गया खर्च समाप्त हो जाता है। वर्तमान में भोग के नाम पर ज्यादा खर्च किया जा रहा है, जबकि धर्म के नाम पर खर्च की बारी आती है तो जेब पर हाथ नहीं जाता है। साधु संतों को आहार कराने में व्यक्ति पीछे हट जाता है, लेकिन शादी समारोह में हजारों लोगों को भोजन करवाना अपनी शान समझते हैं। साधु संतों के मुख से हमेशा आशीर्वाद ही निकलता है।
उन्होंने कहा कि धर्म की पालना महिलाए ही ज्यादा कर रही हैं, पुरुष इसमें पीछे रहते हैं। एक विशेष बात पर बोलते हुए माताजी ने कहा कि जिस घर में महिला धर्म का पालन करती है वहा पर बच्चे भी संस्कारवान होते हैं। धर्म करने वालों का साथ देने वाला भी धर्म का फल प्राप्त कर लेता है। हर माता-पिता को अपने बच्चों को संस्कारों का बीजारोपण बचपन से ही करना चाहिए। क्योंकि जो बच्चा संस्कारवान नहीं होता है अक्सर वह रास्ता भटक जाता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
