गायों का पालन करना चाहिए इससे हमारी रक्षा होती है विमल सागर महाराज
बांसातरखेड़ा
श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विमल सागर महाराज, अनंत सागर महाराज एवं भावसागर महाराज ने प्रेरणादायक उद्बोधन प्रदान किया।
मुनिश्री विमल सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि कथाएं पुण्य का खजाना होती है। गायों का पालन करना चाहिए, इससे हमारी भी रक्षा होती है। आज के वर्तमान पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि आज बच्चे विदेश जा रहे हैं, माता-पिता को पानी देने वाला कोई नहीं है। प्रभु और गुरु पुण्यात्मा को ही मिलते हैं।






दान से धन और जीवन दोनों सफल होते हैं भावसागर महाराज
धर्म सभा में पूज्य मुनि श्री 108 भावसागर महाराज ने कहा की पुण्य से धन कमाओ, पुण्य कार्य में लगाओ। दान देते समय विशुद्ध है तो भगवान बनता है। उन्होंने कहा कि कुआं रोज लुटाता है, और जब लुटाता है तो नए स्रोत आते जाते हैं। दान देने की जीवन व धन दोनों सफल होते हैं।
महाराज श्री ने कहा कि अपने साधनों के अनुरूप दान करो, ईश्वर तुम्हारे दान के अनुरूप तुम्हारे साधन बना देगा। जो मनुष्य अपनी बढ़ती हुई लक्ष्मी को सर्वदा परोपकार के कार्यों में देता है, उसकी लक्ष्मी सदा सफल है। महाराज श्री ने कहा कि हमारे देश में त्यागी की पूजा होती है, और दानी की प्रशंसा। त्याग जीवन में सम्मान कराता है। त्याग ही जीवन के सौंदर्य को निखारता है। दान देने के बाद नृत्य करके आनंद मनाना चाहिए। दान देने के बाद आज तक कोई गरीब नहीं हुआ। जिन्होंने भी दान दिया और दान देने के बाद जमीन मकान बेचने का सोचा था, लेकिन वह बेचना नहीं पड़ा और दान की राशि चूक गई। दानी और प्रिय बोलने वाले लाखों में भी दुर्लभ हैं।
तुम्हारे द्वारा जोड़े गए धन से समाज, देश, समूह का कल्याण हो, धर्म की प्रभावना हो, संस्कृति की रक्षा हो, राष्ट्र का उत्थान हो, और मानवता की सेवा होती है। बिन मांगे देने पर लाख गुना पुण्य होता है। गुप्त दान देने से करोड़ों गुना पुण्य होता है। दान देने वाला ऊपर उठता जाता है। गृहस्थ आश्रम में सिवाय दान के दूसरा कोई कल्याण करने वाला नहीं है। दान विघ्नों का नाश करने वाला है। शत्रु का बेर दूर करने वाला है। दान से इंसान का नसीब खुलता है। दान देने से पूरी दुनिया में यश कीर्ति फैलती है। लोगों में चर्चा होती है। दान दिए बिना सोना नहीं और दान देकर रोना नहीं। दाता करोड़ों में एक मिलता है। इंसान कहता है यह जमीन मेरी है, संपत्ति मेरी है, यह धन मेरा है। लेकिन पैसा तो कभी नहीं कहता कि मैं तुम्हारा हूं। कितनों ने उनका आदर किया। तिजोरी में संभाल कर रखा। फिर भी वह नहीं कहता कि मैं तुम्हारा हूं। लेकिन व्यक्ति कहता है कि पैसा मेरा है। और मैं इसका मालिक हूं। इसलिए धन का उपयोग अच्छे कार्य में करना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
