सभ्य व संस्कारवान समाज का निर्माण जब ही संभव है, जब हम भगवान के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करें स्वस्ति भूषण माताजी
केशोरायपाटन
धर्म सभा को संबोधित करते हुए पूज्य गुरु मां स्वस्ति भूषण माता जी ने शुक्रवार की बेला में अपने उद्बोधन में कहा कि सभ्य एवं संस्कारवान समाज का निर्माण जब ही संभव है जब हम भगवान के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करें।
पूज्य माताजी ने कहा कि गुरु शिष्य का संबंध अनादि काल से है, देव शास्त्र व गुरु का रिश्ता आत्मा का रिश्ता होता है, जो जन्म-जन्म तक काम आता है। घर संपत्ति मकान बंगला कुछ भी साथ नहीं जाता है। रिश्तेदार भी इसी जन्म में साथ रहता है। अगले जन्म में सिर्फ आत्मा का रिश्ता साथ आता है। उन्होंने एक उदाहरण के






माध्यम से बताया एक घड़ी में तीन सुई होती है इस प्रकार माला फेरना, पूजा करना, स्वाध्याय करना सभी धार्मिक क्रियाओ का उद्देश्य जीवन में विशुद्धि बढ़ाना और पापों से बचने का है। साधु श्रावकों की आत्मा की उन्नति के पथ पर बढ़ने का उपदेश देता है।
एक विवरण केशोरायपाटन के शनि अनिष्ट निवारक मुनिसुवृतनाथ भगवान
केशोरायपाटन
मुनिसुवृतनाथ भगवान की प्रतिमा के अतिशय एवं चमत्कार को लेकर कई रोचक जानकारियां हैं। कहां जाता है कि मोहम्मद गोरी ने इस क्षेत्र पर आक्रमण किया और मूर्ति तोड़ने का प्रयास किया। सफल होने पर टंकियां से काटने का प्रयास किया। तब उसमें से दूध की धारा प्रबल वेग से निकलने से आक्रमणकारी भाग छूटे।
हथौड़ी आदि की चोट के निशान मूल नायक प्रतिमा पर अब तक बने हुए हैं। जैन धर्म में मुनिसुवृतनाथ भगवान ही शनि अनिष्ट निवारक के रूप में देश भर में ख्याति है। शनि अमावस्या पर शनि निवारण के लिए देशभर से सैकड़ो श्रद्धालु दर्शन करने के लिए यहां पहुंचते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
