हमारी श्रद्धा ही गुरु को बड़ा बनाती है प्रमाण सागर महाराज मुनिसंघ हुआ दमोह में मंगल प्रवेश
दमोह
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज, मुनि श्री 108 निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री 108 विराट सागर महाराज, मुनि श्री 108 संथान सागर महाराज, मुनिश्री 108 निसंग महाराज का शुक्रवार की बेला में दमोह नगर में मंगल प्रवेश हुआ।
दिगंबर जैन पंचायत के सदस्य सुनील वेजीटेरियन ने जानकारी देते हुए बताया कि मुनि संघ का शुक्रवार की प्रातः बेला में दमोह नगर में प्रवेश हुआ। पूज्य मुनि संघ की समाज जनों ने मंगल अगवानी की पूज्य मुनि संघ का जगह-जगह पद प्रक्षालन किया गया। उसके बाद जैन धर्मशाला में धर्म सभा हुई।






धर्म सभा में सर्वप्रथम अपने उद्बोधन में विराट महाराज ने मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज की महिमा का बखान करते हुए कहा कि प्रमाण सागर जी महाराज के हर शब्द में प्रमाणिकता होती है, उनका मेरे जीवन पर बहुत बड़ा उपकार है, जिसे कभी विस्मृति नहीं किया जा सकता। उनसे मैंने अपने जीवन में काफी कुछ सीखा है।
धर्म सभा में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि गुरु कितने बड़े हो यह महत्व नहीं रखता बल्कि हमारी श्रद्धा कितनी बड़ी है यह महत्व की बात है। क्योंकि हमारी श्रद्धा ही गुरु को बड़ा बनाती है।
महाराज श्री ने एकलव्य का उदाहरण देते हुए कहा कि अर्जुन को गुरु द्रोणाचार्य का वह लाभ नहीं मिला जो लाभ श्रद्धा के बल पर एकलव्य ने प्राप्त किया।
गुरु हमारे हृदय की वेदी पर विराजमान होने चाहिए। श्रद्धा की ज्योति को सदैव जागृत रखना चाहिए। गुरु की बातों को समझना एवं एक दूसरे को समझना आवश्यक है। मोक्ष मार्ग आत्मा की समझ है। अपने स्वरूप की एवं आपकी समझ को बनाकर रखें। जहां समझ है वहां आनंद है। आज जरूरत विवेक की है। आवेग में विवेक नष्ट हो जाता है। बहुत लोग अतिरेक और अतिरंजन के बहाव में बहुत कुछ नष्ट कर देते हैं। सही समझ से काम ले तो सही नतीजे पर पहुंचते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
