मन से वाणी से शरीर से अहिंसा का पालन करने पर महावीर जयंती मनाना सार्थक होगीआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
बांसवाड़ा। 
सकल जैन समाज और पुलक चेतना मंच के संयोजन में महावीर स्वामी का 2550 वी जन्म जयंती श्रद्धा विश्वास भक्ति उत्साह पूर्वक पंचम पट्टाधीश दिगंबर जैन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में मनाई गई।
इस अवसर पर आयोजित धर्म सभा में धर्म देशना में आचार्य श्री ने बताया कि श्री आदिनाथ भगवान से लेकर श्री महावीर स्वामी 24 तीर्थंकरों सहित अनेक भव्य आत्माओं ने तप ,संयम से शाश्वत सुख मोक्ष को प्राप्त किया है।



महावीर जयंती भी जैन समाज को उत्साह पूर्वक श्रद्धा भक्ति से मनाना चाहिए महावीर स्वामी ने अपने प्रवचन, उपदेश और आचरण से आदर्श प्रस्तुत किया है इसके पालन से आपका जीवन धन्य हो सकता है। 
यह प्रवचन वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रस्तुत कर आगे बताया कि अहिंसा परमो धर्म का नारा लगाने से अहिंसा की बात नहीं होती है किसी प्राणी का धात करने के साथ बल्कि मन वचन और काय शरीर से भी हिंसा होती है।
इस पर अंकुश जरूरी है प्राणी एक इंद्रीय से पांच इंद्रीय तक होते हैं और चारों गति के प्राणी इसमें शामिल है इसलिए मन को अहिंसक बनाना जरूरी है, वाणी भी आपकी अहिंसक होना चाहिए ।वाणी ऐसी होना चाहिए जिससे किसी का दिल नहीं दुखी हो आचार्य श्री ने भौतिक साधनों इंटरनेट मोबाइल टी वी का संकेत करते हुए बताया कि उनके उपयोग पर सावधानी जरूरी है इससे भी हिंसा अधिक हो सकती है।
वर्तमान स्थिति में पुत्र पति-पत्नी भाई एक दूसरे का हिंसा करते हैं हिंसा का तांडव नृत्य दुखद है भगवान ने अहिंसा का संदेश दिया है इसलिए चार कषाय क्रोध, मान, माया और लोभ पर रोक होना चाहिए अहिंसा शब्द व्यापक है अहिंसा परमो धर्म की सार्थकता इसी में है कि आप जीवन को अहिंसा मय बनाने का प्रयास करें ।तीर्थंकर भगवान, जिनवाणी ,संतो और महापुरुषों ने अहिंसा का संदेश दिया है आचार्य श्री ने एक संस्मरण बताया कि वर्ष 2018 श्री बाहुबली भगवान के महा मस्तकाभिषेक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हमारे दर्शन कर आशीर्वाद , हमने जैन साहित्य भेंट कर एक डायरी में आशीर्वचन में यही लिखा कि विश्व के प्रति मैत्री भाव रखें ।मैत्री के संदेश से भारत की प्रगति हो रही है और भारत विश्व गुरु बनने की और अग्रसर है। महावीर जयंती पर अहिंसा का संदेश के साथ संयम ,तप, क्षमा रखने से जीवन में उन्नति होती है और अन्य प्राणियों का भी भला होता है स्वयं की उन्नति से देश की उन्नति होती है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में ,परिवार में,समाज ,नगर में अहिंसा स्थापित करने का प्रयास कर जीवन को सार्थक करने का पुरुषार्थ करना चाहिए । 
आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव आगामी 13 से 15 अक्टूबर 2024 से राजस्थान के
पारसोला नगर से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के निर्देशन में प्रारंभ होने वाले अंतराष्टीय कार्यक्रम से अवगत करा कर कार्यक्रम देश में मनाने की प्रेरणा दी।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
